
आकृति बिल्डर राजीव सोनी (Photo Source - Patrika) घर की फोटो (Photo Source- magnific)
Bhopal news:एमपी के भोपाल शहर में रियल एस्टेट कारोबार निवेशकों की रकम डूबने से के मामलों में अब जिला प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। तहसीलदार कोलार यशवर्धन सिंह ने ऐसे ही एक मामले में बीते कई साल से निवेशकों की रकम दबाने और संपत्ति पर कब्जा नहीं देने वाले आकृति डेवलपर के प्रोपराइटर राजीव सोनी को 15 दिन के लिए जेल भेज दिया है। यदि 15 दिन में निवेशकों की करोड़ों रुपए की रकम नहीं लौटाई जाती तो सजा बढ़ती चली जाएगी। प्रदेश में ये दूसरा मामला जब निवेशकों की रकम फंसाने के आरोप में बिल्डर को जेल भेजा गया है।
तहसीलदार कोर्ट के मुताबिक रेरा के आदेश के बावजूद जुर्माने की राशि वसूल नहीं होने पर कोलार तहसील कोर्ट ने आकृति बिल्डर यानी एजी-8 वेंचर्स प्रा.लि. के डेवलपर राजीव सोनी पिता पुरुषोत्तम दास सोनी को 15 दिन के लिए जेल भेजने के आदेश दिए हैं। खास बात यह है कि जुर्माना वसूलने के लिए उनकी संपत्तियों की कुर्की की पांच बार कोशिश की गई, लेकिन बिल्डर के रसूख, प्रभाव और संपत्तियां बैंक और अन्य संस्थानों के पास गिरवी होने के कारण कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद कोर्ट ने जेल भेजने का फैसला लिया।
कोलार तहसीलदार यशवर्धन सिंह के मुताबिक, रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) के फाइन ऑर्डर के तहत आकृति ग्रुप के डेवलपर से जुर्माने की राशि वसूल की जानी थी। इसके लिए डेवलपर के कई प्लॉट चिह्नित कर कुर्की की प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश की गई। इस संबंध में पांच बार सुनवाई भी हुई, लेकिन वसूली की कार्रवाई सफल नहीं हो सकी।
प्रदेश में किसी बिल्डर को जेल भेजने का यह दूसरा मामला बताया जा रहा है। इससे पहले भी कोलार तहसील कोर्ट ने सरवेश बिल्डर विवेक मिश्रा को भी जेल भेजा था। ताजा कार्रवाई से स्पष्ट है कि रेरा के आदेशों के पालन में लापरवाही और बकाया वसूली के मामलों में प्रशासन अब कठोर कदम उठा रहा है।
राजधानी में आशियाने का सपना लेकर बिल्डर को लाखों रुपये देने वाले कई परिवारों की परेशानियां रियल एस्टेट व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। आकृति बिल्डर्स से जुड़ी एजी-8 वेंचर्स की विभिन्न परियोजनाओं में घर खरीदारों की शिकायतें, अधूरे निर्माण, बिजली व्यवस्था का विवाद और नियामकीय कार्रवाई लंबे समय से सुर्खियों में रहे हैं।
आकृति एक्वासिटी परियोजना में वर्ष 2011 से 2017 के बीच कई खरीदारों ने फ्लैट बुक किए थे। कब्जा नहीं मिलने और जमा रकम के इस्तेमाल को लेकर विवाद सामने आया। दिसंबर, 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण ने एजी-8 वेंचर्स के पक्ष में कंपनी दिवाला प्रक्रिया से जुड़े मामले में अपील स्वीकार की थी। इससे पहले रेरा ने परियोजना का पंजीयन रद्द करने और खरीदारों की रकम लौटाने से जुड़े आदेश दिए थे।
Updated on:
25 Oct 2026, 8:26 AM IST
Published on:
25 Oct 2026, 8:26 AM IST
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