
भोपाल. पूरी दुनिया हर साल 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस (Earth Day) मनाती आ रही है। विश्व ने पहली बार विश्व पृथ्वी दिवस 1970 में मनाया उसके बाद से देश दुनिया में इसे लगातार मनाया जाता है। साल 2021 में विश्व पृथ्वी दिवस को 50 साल पूरे हो रहे हैं।
पृथ्वी दिवस का उद्देश्य
दुनिया में पृथ्वी दिवस हमारी धरती पर मौजूद जीव-जन्तुओं, पेड़-पौधों को बचाने और पर्यावरण के प्रति लोगों में जागरुकता लाने के लिये मनाया जाता है। यही इसका प्रमुख उद्देश्य भी है। दुनिया में मनुष्य के साथ साथ सभी जीव जंतुओं को अच्छे पर्यावरण की जरुरत है। जिससे लिए हमेशा प्रयास किये जाने चाहिए।
दुनिया के अलग अलग देशों और उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव पर जिस तरह से ग्लेशियर पिघल रहे हैं, ग्लोबल वार्मिंग इसका बढ़ा कारण बनकर सामने आया है। इसके पीछे दुनिया में बढ़ता प्रदूषण है, इससे पृथ्वी का जलवायु तंत्र भी प्रभावित हो रहा है। अगर समय रहते दुनिया ने इस बारे में निर्णय नहीं लिया तो भविष्य में काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
नेल्सन व अल्बर्ट का योगदान
प्रथ्वी दिवस की शुरुआत अमेरिका से हुई जहां सीनेटर गेलोर्ड नेल्सन ने 1970 में पर्यावरण शिक्षा के रूप में पृथ्वी दिवस की स्थापना की। सीनेटर नेल्सन ने पर्यावरण को एक राष्ट्रीय एजेंडे से जोड़ने के लिए पहले राष्ट्रव्यापी पर्यावरण विरोध की प्रस्तावना दी थी। पृथ्वी दिवस को शुरु करने में हॉलीबुड अभिनेता एड्डी अल्बर्ट ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। और एड्डी अल्बर्ट के जन्मदिन पर 22 अप्रैल को ही ये दिवस मनाया जाने लगा।
प्रथ्वी दिवस 2021 की थीम
साल 2021 में प्रथ्वी दिवस की थीम 'जलवायु परिवर्तन' (Climate Action) है। विश्व की जलवायु में हो रहे बदलाव से पूरी दुनिया पर संकट मंडराने लगा है। क्लाइमेट चेंज की वजह से लाइफ सपोर्ट सिस्टम खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। प्रथ्वी दिवस संगठन (Earth Day Organization) ने कहा है कि अब दुनिया को साथ आकर काम करने की जरूरत है। विश्व के जलवायु संकट से निपटने के लिए सभी देशों को एक साथ मिलकर काम करना होगा।
भोपाल स्थित अंतररराष्ट्रीय संस्था जीसीड (Global Earth Society for Environment Energy and Development) की ओर से स्थापित जनता की लैब की ओर से जुटाई जानकारी कहीं अधिक चौंकाने वाली हौ जीसीड प्रमुख पर्यावरणविद् डॉ.सुभाष सी पांडेय बताते हैं कि, खतरनाक वायु प्रदूषकों से लेकर पार्टिकुलेट मेटर, वाष्पशील कार्बनिक यौगिक, नॉक्स, सॉक्स, कार्बनमोनो ऑक्साइड और अन्य ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा बढ़ती जा रही है। अगर दुनिया जल्द नहीं संभाली तो बहुत देर हो जाएगी।