
भोपाल। ना धर्म और ना जात-पात, न कोई शुल्क। योग को बढ़ावा देने शहर में इस आधार पर कई लोग काम कर रहे हैं। शहर को सेहतमंद बनाने जहां कई संस्थाएं लगी हैं वहीं व्यक्तिगत तौर पर लोगों की इसमें भागीदारी हैं। इनमें कई ऐसे हैं जो घर-घर जाकर भी योग सिखाने में लगा हैं तो कुछ ने तो सेवानिवृत्त होने के बाद पूरा समय ही इसी के नाम कर दिया। वर्तमान में अलग-अलग स्थानों पर करीब पांच हजार लोग इसे सीख रहे हैं।
नौकरी के बाद सीखा योग, अब दे रहे दूसरों को सीख
भेल में सीनियर सोलमेन पद से रिटायर्ड अभिवन होम्स निवासी वामनराव आकोटकर ७१ साल की उम्र में लोगों को योग का नि:शुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं। तकरीबन १० साल पहले नौकरी से रिटायर होने के बाद उन्होंने अपना ज्यादातर समय योग के नाम कर दिया। कभी अपनी पांच छह दोस्तों के साथ फार्म हाउस पर जाकर वे नित्य योगा करते थे, और धीरे-धीरे उन्होंने लोगों को भी योग सीखाना शुरू किया। पिछले छह सालों से वे लगातार योग का प्रशिक्षण लोगों को देते हैं। करीब पांच सौ से अधिक लोगों को इस बीच योग का प्रशिक्षण दिया। इन्होंने बताया कि यह प्रयास आगे भी जारी रहेगा। अयोध्या एक्सटेंशन गार्डन में लोगों को योग का प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसमें बुजुर्ग, युवा और महिलाएं सभी लोग योग सीखते हैं।
घर-घर जाकर देते थे योग को बढ़ावा
योग को बढ़ावा देने के लिए महेश अग्रवाल पहले घर घर जाकर लोगों से संपर्क कर इस बारे में बताते थे। सालों पहले इनके जरिए शुरू हुए इस काम से लोगों में ऐसी जागरूकता आई कि अब सैकड़ों को इसका फायदा मिल रहा है। स्वर्ण जयंती पार्क में संचालित आदर्श योग केन्द्र के जरिए अग्रवाल हजारों लोगों को निशुल्क प्रशिक्षण दे चुके हैं। ये सिलसिला अब भी जारी है। इन्होंने बताया कि वर्ष २०१० में वे पेट व डिपे्रशन जैसी कई बीमारियों से पीड़ित थे। एलोपैथी से जब फायदा नहीं मिला तो योग का सहारा लिया। इससे काफी राहत मिली। अब तक वर्ष २०१५, २०१६, २०१७ में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के बड़े आयोजन किए और योग स्मारिका प्रकाशित की गई। योग के जरिए लोगों को सेहतमंद करने का संकल्प है। इसी के तहत शहर में काम किया जा रहा है।
५० सालों से प्रशिक्षण, अब तक हजारों शिविर
करीब पचास सालों से योग को बढ़ावा देने के काम में लगा डॉ. गांगुली योग विद्यापीठ संस्था के जरिए इस दिशा में सैकड़ों शिविर का आयोजन किया गया। संस्था का दावा है कि करीब पांच लाख लोगों को प्रशिक्षण दिया गया। जिससे उनकी सेहत सुधरी।