
भोपाल। कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने के दो माह बाद भी वेतन नहीं लिया है। वे सांसद के तौर पर मिलने वाला वेतन और सुविधाएं ले रहे हैं, ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री का वेतन लेकर लाभ के पद में नहीं उलझना चाहते। विधायक बनने के बाद वे मुख्यमंत्री का वेतन ले सकते हैं।
कमलनाथ छिंदवाड़ा से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। उनके लिए दीपक सक्सेना ने छिंदवाड़ा सीट खाली कर दी है। मालूम हो कि सांसद को 50 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन मिलता है, जबकि मुख्यमंत्री का वेतन भी इतना ही है। भत्ते अलग हैं। इसमें भत्ते जोड़े जाएं तो मुख्यमंत्री के लिए यह राशि दो लाख से अधिक होती है, जबकि सांसद का वेतन-भत्ता पौने दो लाख रुपए है।
सरकार ने प्लास्टिक पार्क का उद्घाटन करना चाहा। तत्कालीन एपीसीसीएफ जेपी शर्मा ने ऐसा नहीं होने दिया। मई 2015 को उनकी सेवानिवृत्ति के बाद भाजपा सरकार में उद्घाटन कराया गया। यही नहीं एकेवीएन ने शर्मा पर 97 करोड़ रुपए का दावा ठोक दिया। तर्क दिया गया इन्होंने प्लास्टिक पार्क स्थापित होने में बाधा पहुंचाई, जिससे निवेश प्रभावित हुआ।
यह है मामला
तामोट में पुराना खसरा क्रमांक 597 (नया क्रमांक 726) की भूमि 1916 से आरक्षित वन है। इसे राजस्व भूमि बताकर 96.345 हेक्टेयर भूमि कलेक्टर रायसेन ने 2008 में उद्योग विभाग को आवंटित कर दी।
इधर, रिटायर्ड आइएफएस से 97 करोड़ रुपए का मुकदमा हारी सरकार...
वहीं दूसरी ओर वन भूमि पर कब्जे के खिलाफ रिटायर्ड आइएफएस जेपी शर्मा ने आवाज उठाई तो पिछली भाजपा सरकार ने शासकीय काम में बाधा डालने का 97 करोड़ का दावा ठोक दिया। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद शर्मा को कोर्ट ने राहत दी है।
मामला रायसेन जिले में रातापानी अभ्यारण्य पास वन भूमि को राजस्व भूमि बताकर तामोट प्लास्टिक पार्क में उद्योगों को जमीन आवंटित करने से जुड़ा है। प्लास्टिक पार्क के लिए 69.345 हेक्टेयर भूमि का चयन किया था। सरकार ने इसे राजस्व और वन विभाग ने वनभूमि माना। कलेक्टर ने आपत्ति खारिज कर काम शुरू करा दिया।
उद्योग विभाग ने यह भूमि औद्योगिक केन्द्र विकास निगम (एकेवीएन) को दे दी। वनभूमि को राजस्व भूमि बताने पर वन विभाग ने आपत्ति ली। आपत्ति को दरकिनार करते हुए एकेवीएन ने प्लास्टिक पार्क विकसति कर दिया।
यह कहा कोर्ट ने
रायसेन जिला न्यायालय ने अपने फैसले में कहा है कि सरकार में जिम्मेदार पद पर रहते हुए अफसर ने अपना काम ईमानदारी से किया। अफसर पर लगाए गए आरोप अटकलबाजी पर आधारित हैं। कोर्ट ने इस बात की सराहना की कि सेवा में रहते हुए अफसर ने न सिर्फ जंगल बचाने का प्रयास किया, बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद भी ग्रीन ट्रिब्यूनल में अपील की।
मैंने प्लास्टिक पार्क के लिए वनभूमि पर कब्जा होने से रोकने का प्रयास किया। वन विभाग की आपत्ति को लगातार खारिज किया गया। यही नहीं जिस वनभूमि को राजस्व की भूमि बताकर कब्जा किया, उससे अधिक भूमि पर सरकार ने ही अतिक्रमण कर उद्योगों को आवंटित कर दी।
- जेपी शर्मा, तत्कालीन प्रधान अपर मुख्य वन संरक्षक