
फास्ट फूड, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)
Bhopal news: मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में खाद्य विभाग के मार्च 2026 महीने से चलाए जा रहे विशेष जांच अभियानों के बावजूद मिलावटखोरों पर नकेल पूरी तरह नहीं कस पाई है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन का पूरा फोकस केवल पारंपरिक खाद्य पदार्थों (दूध, मावा, तेल और मसालों) के सैंपल लेने तक सीमित है। आंकड़ों के अनुसार मार्च से अब तक लिए गए। कुल नमूनों में से 70 फीसदी से अधिक जांच केवल डेयरी और एडिल ऑयल सेगमेंट तक सीमित रही। बच्चों और युवाओं की सेहत से खिलवाड़ कर रहे फास्ट फूड, बेकरी प्रॉडक्ट्स, केमिकल से पकाई जा रही सब्जियों और मीट-पोल्ट्री जैसे अति-संवेदनशील सेगमेंट पर विभाग का ध्यान न के बराबर है। मार्च से सितंबर 2026 के दौरान विभाग द्वारा कुल 1,450 खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए।
दूध व डेयरी उत्पाद- 58040
खाद्य तेल व घी- 36225
मसाले व खाद्यान्न- 21815
मिठाइयां व त्योहारी खाद्य- 17412
अन्य- 11608
सार्वजनिक स्थल व बिक्री के लिए बाजार में उपलब्ध हर खानपान की जांच जरूरी है। ऐसे 1000 से अधिक सेगमेंट है, लेकिन कुछ चुनिंदा तक ही विभाग सीमित है। दायरा बढ़ाने की जरूरत है तभी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी। - हरिओम वैष्णव, खाद्य सुरक्षा, जागरूकता कार्यकर्ता
-नियमित जांचों तथा विशेष अभियानों के दौरान 100 प्रकरण दर्ज किए गए।
-बड़े रेस्टोरेंट और पब पर चलाए गए संयुक्त अभियान में ही 90 प्रकरण दर्ज किए गए थे।
-म्यूनिसिपल कोर्ट ने जरूर ऑन स्पॉट 5.80 लाख का जुर्माना वसूला।
-मावा, पनीर, घी, तेल, दूध और अन्य खाद्य सामग्रियों के 1,000 से अधिक नमूने लेकर राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजे गए। जब्ती, प्रकरण के बाद जा व जुर्माने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
-20 क्विटल से संदिग्ध मावा, 500 किलो पनीर और एक्सपायरी/दूषित सामग्री जब्त व नष्ट कराई गई।
Updated on:
24 Sept 2026 09:34 am
Published on:
24 Sept 2026 09:34 am
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