भोपाल

न्यू मार्केट, एमपी नगर के बाद होशंगाबाद रोड की जमीनें महंगी?

पंजीयन विभाग की निगाह में सबसे ज्यादा हॉट प्रॉपर्टी होशंगाबाद रोड पर, दो गुने प्रस्तावित कर दिए रेट, हकीकत है उलट
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Mar 02, 2019
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घर खरीदने का सपना हुआ महंगा, जमीनों के रेट बढ़ाने का गाइडलान तैयारी

भोपाल। राजधानी में न्यू मार्केट, एमपी नगर के बाद होशंगाबाद रोड की जमीनें ज्यादा महंगी हो गईं हैं। पंजीयन विभाग के प्रस्ताव में कुछ एेसा ही तस्वीर सामने आई है। एक एकड़ जमीन की कीमत १२ करोड़ से ज्यादा प्रस्तावित कर दी है। जबकि यहां रेट ७ से ९ करोड़ रुपए एकड़ के हैं। रेट बढ़ाने के पीछे यहां प्रोजेक्ट की अधिक संख्या होना बताया जा रहा है।

फ्लैट रेडी टू पजेशन की स्थिति में हैं। हाल ही में रजिस्ट्री की संख्या बढ़ी है, आने वाले समय में यहां और ज्यादा रजिस्ट्रियां होंगी। री-सेल की प्रॉपर्टी भी काफी है। आने वाले समय में कुछ और बड़े प्रोजेक्टों की तैयारी भी यहां शुरू हो गई है। आने वाले समय में रजिस्ट्री की संख्या बढ़ते देखकर यहां ज्यादा रेट प्रस्तावित कर दिए हैं।

जानकार बताते हैं कि शहर में अरेरा कॉलोनी, अरेरा हिल्स, शाहपुरा, एमपी नगर, अशोका गार्डन, पुराना शहर, न्यू मार्केट, चूना भट्टी, विद्या नगर, साकेत नगर सहित, भोपाल टाकीज सहित आधा दर्जन एेसे क्षेत्र हैं जो डेंस क्षेत्र में परिवर्तित हो चुके हैं। पहले से ही यहां के रेट काफी ज्यादा है। इन क्षेत्रों में सिर्फ री-सेल की प्रॉपर्टी की गुंजाइश बची है। इस कारण इन जगहों पर रेट नहीं बढ़ाए गए। सिर्फ एन्हें क्षेत्रों को टारगेट किया गया जहां बिल्डरों के नए प्रोजेक्ट बन रहे हैं या बन कर तैयार हैं। शहरी क्षेत्र में होशंगाबाद रोड को पंजीयन ने प्राइम लोकेशन माना है।

रेट कम करने की मांग उठी

दीपड़ी में जमीनों के रेट कम करने के लिए मैसर्स कोल ने आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि पहले से ही दीपड़ी में रेट ज्यादा है। यहां रेट कम किए जाएं। देवरीकला रोड में प्लॉटों के रेट ज्यादा बताते हुए सिग्नेचर ग्रीन प्रोजेक्ट की तरफ से रेट कम करने की मांग की गई है। इसी प्रकार डायवर्टेड जमीन के रेट कम करने के लिए भी तीन अलग-अलग अपत्तियां पंजीयन कार्यालय मेंं की गईं हैं।

बढ़ गई रजिस्ट्री की संख्या
पिछले चार दिन से भोपाल में रजिस्ट्रियों की संख्या बढ़ गई है। पिछले चार दिन में भोपाल में शुक्रवार को हुंई २७२ रजिस्ट्री मिलाकर ११२० रजिस्ट्री हुईं हैं।

हमारा हर बार यही कहना है कि वर्ष २०१० के रेट जब तक नहींे लाएंगे, कुछ नहीं हो सकता। बाजार की स्थिति खराब ही रहेगी।
मनोज मीक, प्रवक्ता क्रेडाइ

Updated on:
02 Mar 2019 08:59 am
Published on:
02 Mar 2019 08:59 am