सीएम पर लगाए कई आरोप, कहा सरकार के साथ रहकर लगा धर्म विरोधी लांछन...
भोपाल@आलोक पांड्या की रिपोर्ट...
सरकार और कंप्यूटर बाबा के बीच चल रहे सियासी घमासान के बाद आखिरकार सोमवार को कंप्यूटर बाबा ने अपने राज्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
वहीं इसके ठीक अगले दिन यानि मंगलवार को राज्यमंत्री रहे कम्प्यूटर बाबा सीएम को पाखंडी तक कह गए। इसके अलावा कंप्यूटर बाबा ने बीजेपी सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए हवन भी किया।
राज्यमंत्री का दर्जा मिलने से पहले कंप्यूटर बाबा ने नर्मदा नदी के दोनों तट पर पेड़ पौधे लगाने के कथित घोटाले का खुलासा करने एवं अवैध रेत उत्खनन पर प्रतिबंध लगाने के लिए अप्रैल में 'नर्मदा घोटाला रथ यात्रा' निकालने का आह्वान किया था।
इसके बाद राज्य सरकार ने अप्रैल में पांच बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा दिया था, जिनमें वह भी शामिल थे। राज्यमंत्री का दर्जा मिलने के बाद उन्होंने यह कह कर रथ यात्रा रद्द कर दी थी कि राज्य सरकार ने नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए साधु संतों की कमेटी गठित करने की उनकी मांग पूरी कर दी।
ये लगाए आरोप...
राज्यमंत्री रहे कम्प्यूटर बाबा का आरोप है कि चुनाव के चलते सीएम ने अवैध उत्खनन पर कार्रवाई नहीं करने दी। कंप्यूटर बाबा का कहना है कि सरकार के साथ रहकर धर्म विरोधी लांछन लग गए थे, अत: पवित्र होने के लिए आज शाम नर्मदा स्नान करूंगा।
पहले CM शिवराज पर की थी ये भविष्यवाणी...
वहीं इससे पहले रायसेन में मप्र में राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त महामंडलेश्वर कम्प्यूटर बाबा ने साधु संतों की राजनीति पर अपने विचार रखते हुए शहर के महामाया चौक में खुले आम शिवराज सरकार के पुन: बहुमत में आने की भी घोषणा की थी।
यहां उन्होंने कहा था कि शिवराज सरकार इस बार मप्र में फिर से काबिज होने जा रही है। क्योंकि उनके द्वारा मप्र में किए गए विकास व गरीबों सहित आमजनों की भलाई के लिए बनाई गईं जन कल्याणकारी योजनाएं मुंह से बोल रही हैं। लोगों को इनका फायदा भी मिल रहा है। हम अपनी इस यात्रा पर निकले हैं।
नाराजगी का ये भी है कारण!...
दरअसल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधानसभा चुनाव 2018 से पहले गौ मंत्रालय बनावाने की घोषणा की है,लेकिन अभी तक गायों के लिए कोई काम नहीं शुरू होने कंप्यूटर बाबा नाराज चल रहे थे। बताया जा रहा है कि इसी नाराजगी के चलते उन्होंने सरकार के राज्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है।
कहीं ये चुनाव में उतरने की तैयारी तो नहीं!...
वहीं राजनीति के जानकार डीके शर्मा का कहना है कि मध्यप्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पांच बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा दिए जाने के बाद से ही राज्य के बाकी साधु संतों में भी राजनीति में आने की होड़ लग गई। इन दिनों राज्य में ये भी चर्चा है कि इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों में उतरने के लिए भी साधु संत तैयारी कर रहे हैं।
पहले ही कर दिया था राजनीति में आने का इशारा...
जबकि पूर्व में रायसेन में ही महामंडलेश्वर कम्प्यूटर बाबा ने कहा था कि भारतीय संविधान में साधु-महात्माओं को भी साफसुथरी राजनीति करने का हक व अधिकार है। अपने भजन सत्संग पूजन के साथ जो परमार्थ के काम हैं उनको भी करना हमारा परम दायित्व है। इसीलिए यह कहना राजनीतिकारों का बिल्कुल गलत है कि साधु संतों को राजनीति से बचना चाहिए।
इसका ताजा उदाहरण यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। वहां अब गुुंडागर्दी नहीं बल्कि रामराज चल रहा है। इसके अलावा और भी दर्जनों साधु संत विधायक व सांसद हैं। इसी तरह मप्र की शिवराज सरकार सनातन Hindu धर्म भगवा की सरकार है। इसमें भी साधु संतों की किसी तरह की कोई उपेक्षा नहीं हो रही है।
जबकि बताया जाता है कि पूर्व में कंप्यूटर बाबा के नाम से मशहूर स्वामी नामदेव त्यागी अपने चुनाव लड़ने का इच्छा भी जाहिर कर चुके थे। इस दौरान उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री चौहान मुझे विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए कहेंगे, तो मैं तैयार हूं।