
भोपाल/ मध्य प्रदेश में जारी राजनीतिक घमासान के बीच एक बार फिर कांग्रेस विधायकों की खरीद फरोख्त का मामला सामने आया है। इस बार कांग्रेस नेता पी.एल पुनिया ने बीजेपी पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगाया है। सोमवार को विधानसभा का सत्र शुरु होने से पहले उन्होंने कहा कांग्रेस के एक एक विधायक को 25-25 करोड़ रुपए ऑफर दिया गया है। पुनिया यहीं नहीं रुके उन्होंने आरोप लगाते हुए यहां तक कह डाला कि, बीजेपी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रलोभन देकर अपनी तरफ खींचा है। उनसे जुड़े विधायकों का जिस तरह आनन फ़ानन में बिना ऑरिजनल दस्तखत के इस्तीफा हुआ है जो इस्तीफ़े की श्रेणी में नहीं आता।
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कमलनाथ के मंत्री भी लगा चुके हैं आरोप
बता दें कि, इससे पहले कमलनाथ सरकार के मंत्री पी.सी शर्मा ने भाजपा पर आरोप लगाते हुआ कहा था कि, 'हमारे विधायकों को बंदूक की नोंक पर बंधक बनाया गया है।'वहीं, बजट सत्र शुरू होने से ठीक पहले सीएम कमलनाथ ने भी एक बयान में कहा था कि, हमारे साथ बहुमत है और हम तरह के फ़्लोर टेस्ट के लिए तैयार हैं। कमलनाथ ने ये भी कहा था कि, सुप्रीम कोर्ट तक ये कह चुका है कि, स्पीकर के जो अधिकार हैं उसमें कोई दखल नही दे सकता। इसलिए अब ये स्पीकर तय करेंगे, न तो सीएम न ही गवर्नर इसे तय कर सकते हैं। हालांकि, विधानसभा में सत्र के दौरान हुए हंगामे और कोरोना वायरस की सतर्कता के मद्देनजर विधानसभा का सत्र 26 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।
विधायकों को बंधक बनाने का आरोप
बता दें कि, मंत्री पीसी शर्मा ने एक न्यूज चैनल को दिये इंटरव्यू में कहा था कि, हमारे विधायकों को बीजेपी ने बंधक बनाया है। बंदूक की नोक पर विधायकों पर दबाव बनाया गया है। शर्मा ने हमला करते हुए कहा था कि, बीजेपी डरी हुई है, इसलिए वो बटन दबाने की जगह हाथ से वोटिंग की मांग कर रही है। विधानसभा के विशेष अधिकार स्पीकर के पास हैं। फ्लोर पूरा नहीं होगा तो फ्लोर टेस्ट कैसे होगा। शर्मा ने दावा किया कि बजट सत्र पूरा होगा और बजट भी पेश किया जाएगा। कमलनाथ सरकार मजबूत है, उसे कोई खतरा नहीं है।
भाजपा ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
हालांकि, विधानसभा की कार्यवाही 26 मार्च तक स्थगित किये जाने के बाद भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की तरफ से लगाई गई याचिका जल्द से जल्द फ्लोअर टेस्ट कराने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को मंजूर भी कर लिया है, साथ ही 17 मार्च की सुबह इसपर सुनवाई करने की बात कही है। बता दें कि, शिवराज सिंह चौहान की ओर से दायर याचिका में 48 घंटे के भीतर सुनवाई करने की मांग की गई थी।