क्या नोटबंदी पर संघ झूठ बोल रहा है : दिग्विजय, भोपाल में चुनाव प्रचार थमने तक 10 दिन रोज 10 सवाल पूछेंगे। भोपाल में मतदान 12 मई को है।
भोपाल. भोपाल लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह ने भाजपा सरकार से सवाल पूछने का सिलसिला शुरू किया है। वे भोपाल में चुनाव प्रचार थमने तक 10 दिन रोज 10 सवाल पूछेंगे। भोपाल में मतदान 12 मई को है।
दिग्विजय सिंह ने बुधवार को ट्वीट किया- प्रधानमंत्री मोदी जिस नोटबंदी पर गुमान करते रहे, उसे लेकर आरएसएस के भारतीय मजदूर संघ के अध्यक्ष बैजनाथ राय ने कहा था नोटबंदी के कारण चार से पांच करोड़ मजदूरों का रोजगार चला गया।
क्या संघ झूठ बोल रहा है। जवाब दीजिए कि श्रमिकों के साथ अन्याय क्यों? दिग्विजय ने ट्वीट के जरिए पूछे गए 10 सवालों में बेरोजगारी, अर्थव्यवस्था, बैंकों का घाटा, उद्योग धंधे और अच्छे दिन से जुड़े मुद्दे उठाए।
प्रज्ञा ठाकुर के लिए जताई सहानुभूति
दिग्विजय ने भाजपा प्रत्याशी प्रज्ञा ठाकुर के प्रति सहानुभूति जताई है। उन्होंने चुनावी सभा में कहा कि मेरे मुख्यमंत्री के कार्यकाल में प्रज्ञा पर कोई मामला दर्ज नहीं हुआ। यदि उन्हें प्रताडऩा मिली है तो मुझे उनसे सहानुभूति है।
दिग्विजय ने ये जवाब प्रज्ञा के उस आरोप पर दिया जिसमें उन्होंने कहा है कि जब दिग्विजय मुख्यमंत्री थे, तो उन्हें प्रताडऩा मिली थी। दिग्विजय ने चुनाव आयोग पर दोहरे मापदंड अपनाने के आरोप भी लगाए।
उन्होंने कहा कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान की निंदा करता हूं। बयान में मोदी ने पहली बार मतदान करने जा रहे मतदाताओं से शहीदों के नाम पर वोट देने की अपील की थी।
लोकसभा चुनाव में बन सकता है मुद्दा
बसपा की धमकी का सियासी फायदा तलाश रही भाजपा
बसपा लोकसभा चुनाव के बाद मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार से समर्थन वापस ले सकती है। इस बात के संकेत बसपा प्रमुख मायावती ने दिए हैं। मायावती के इस कदम को भाजपा अपने सियासी फायदे के रूप में देख रही है। अभी प्रदेश में तीन चरणों के मतदान बाकी है। ऐसे में भाजपा इसमें भी इसके फायदे की तलाश में जुट गई है। आने वाले दिनों में भाजपा नेताओं के भाषणों में ये मुद्दा नजर आने वाला है।
पिछले घटनाक्रमों को देखा जाए तो कांग्रेस और बसपा के बीच लगातार दूरी बढ़ रही है। बसपा प्रमुख मायावती को लग रहा है कि कांग्रेस उनके वोट बैंक में सेंध लगा रही है। बसपा समर्थन वापस लेती है तो कमलनाथ सरकार पर खतरा बढ़ सकता है। हालांकि सरकार को निर्दलियों का भी समर्थन मिला है।
भाजपा सूत्रों के मुताबिक बसपा और सपा समर्थन वापस लेते हैं, तब पार्टी आगे की रणनीति तय करेगी। कांग्रेस सरकार निर्दलियों के समर्थन पर टिकी रहेगी। निर्दलीय विधायक भी पाला बदलते हैं तो भाजपा को फायदा मिल सकता है। हालांकि भाजपा के विधायकों की संख्या 109 है जबकि कांग्रेस की 113 है।