भोपाल

कांग्रेस में टिकट मिलने से पहले मचा घमासान, महिला कार्यकर्ताओं का फूटा गुस्सा

MP lok sabha election 2019: कांग्रेस में टिकट मिलने से पहले मचा घमासान, महिला कार्यकर्ताओं का फूटा गुस्सा

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Mar 26, 2019
arun yadav mp election 2019

भोपाल. कांग्रेस में टिकट को लेकर घमासान मच गया है। खंडवा में सोमवार को युवा कांग्रेस के सम्मेलन में पार्टी की गुटबाजी सामने आ गई। सम्मेलन में पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव का नाम लिए बगैर खंडवा संसदीय क्षेत्र से बाहरी व्यक्ति को टिकट देने का विरोध हुआ।

बुरहानपुर विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा ने मीडिया से कहा कि खंडवा लोकसभा क्षेत्र के व्यक्ति को टिकट देना चाहिए। अरुण यादव को टिकट मिलता है तो कांग्रेस के लिए सीट निकालना मुश्किल है। वहींए निमाड़ खेड़ी से पूर्व विधायक ठाकुर राजनारायण सिंह ने कहा कि खंडवा संसदीय क्षेत्र के वोटर को टिकट दिया जाए।

यूं फूटा गुस्सा

अनुसूचित जाति महिला कांग्रेस की सदस्य वैशाली ने कहा कि बाहरी व्यक्ति को टिकट देते हैं तो उसे पांच साल ढूंढना पड़ेगा। कांग्रेस कमेटी के महासचिव परमजीत सिंह ने कहा खंडवा की सीट से कोई भी मतदाता हो आप उसे टिकट दें। कुछ लोग चापलूसी करके पदों पर बैठे हैं।

खंडवा के सलीम पटेल ने कहा कि आज कांगे्रस की आबरू बचाने के लिए हमारे नेताओं को जद्दोजहद करना पड़ रही है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष अजय रघुवंशी ने कहा कि जो लोग कांग्रेस में हैं ही नहींए उन्हें यह बात करना शोभा नहीं देता। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी और कमलनाथ का जो निर्णय होगाए वो हमें मान्य होगा। उन्हीं के प्रति हमारी आस्था है।

एडीआर की रिपोर्ट रू आम मतदाता की प्राथमिकता में नौकरीए व्यवसायए बेहतर अस्पताल और शुद्ध पेयजल

प्रदेश में इस बार चुनाव राष्ट्रीय मुद्दों पर नहींए बल्कि बुनियादी सुविधाओं पर फोकस हो सकता है। हाल ही में आए नेशनल इलेक्शन वॉच और एडीआर यएसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिव रिफाम्र्सद्ध के सर्वे रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश के मतदाता अब बुनियादी सुविधाएं चाहते हैं। इनमें नौकरीए व्यवसाय से लेकर कृषिए फसलों का उचित मूल्यए अस्पतालए पीने का पानी सहित 10 प्राथमिकताएं शामिल की गई हैं।

प्रदेश में मतदाताओं के लिए बेरोजगारी सबसे बड़ा मुददा उभरकर सामने आया है। मतदाताओं की प्राथमिकता में बेरोजगारी सबसे पहलेए कृषि उपज का उचित मूल्य दूसरे और बेहतर अस्पताल तीसरे नंबर पर हैं।

चुनाव के वक्त सर्वे

एडीआर ने सर्वे अक्टूबर से दिसंबर 2018 के बीच कियाए तब प्रदेश में विधानसभा चुनाव चल रहे थे। शहरी की तुलना में 70 फीसदी ग्रामीण मतदाता रोजगार को पहली प्राथमिकता देते हैं। रोजगार देने के लिए सरकार द्वारा किए गए प्रयास की रैंकिंग के लिए पांच नंबर रखे गए थे। इनमें दो अंक को औसत माना गया थाए लेकिन मतदाताओं ने सरकार को महज 1.89 नंबर दिए।

चुनाव में उठाए जाने वाले मुद्दों और जुमलों को प्रदेश के वोटरों ने तरजीह नहीं दी। उन्होंने बुनियादी सुविधाओं को ही महत्त्व दिया गया। सेनाए तालाब व झीलों में अतिक्रमण सहित अन्य विषयों में कुछ खास प्रतिक्रिया नहीं दी। पिछली प्रदेश सरकार की परफार्मेंस किसी भी मामले में औसत से ऊपर नहीं रही। पांच अंकों में तीन से ऊपर के अंक को अच्छाए दो को औसत और एक अंक से नीचे की रैंकिंग को खराब की श्रेणी में रखा गया था। वोटरों ने सरकार के किसी भी काम को दो अंक नहीं दिए।

Published on:
26 Mar 2019 11:23 am
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