
भोपाल. प्रदेश में सैटेलाइट टाउनशिप मॉडल की प्री-प्लानिंग के तहत सरकार बड़े शहरों के मास्टर प्लान में कनेक्टिंग सिटी नेटवर्क फॉर्मूला लागू करेगी। इसके तहत जिस बड़े शहर का मास्टर प्लान लाया जाएगा, उसमें आस-पास के शहरों से कनेक्ट करने वाली सड़कों के नेटवर्क की भी प्री-प्लानिंग रहेगी। यह प्री-प्लानिंग मुख्य मास्टर प्लान के एरिया के बाहर की भी होगी। अभी मास्टर प्लान वाले एरिया के बाहर की कनेक्टिविटी को शामिल नहीं किया जाता था। अब भोपाल-इंदौर सहित इनके बाद वाले दूसरे बड़े शहरों के मास्टर प्लान सैटेलाइट टाउनशिप की प्री-प्लानिंग में रोड नेटवर्क एरिया के साथ बनेंगे।
सरकार दिसंबर अंत तक भोपाल का मास्टर प्लान ला रही है, इस कारण इस प्रयोग की शुरुआत भी इसी से होगी। भोपाल का मास्टर प्लान 20 साल बाद आ रह है, इसलिए इसकी प्लानिंग में कई नवाचार किए जा रहे हैं। सैटेलाइट टाउनशिप का मॉडल भी इस प्लान से कनेक्ट करके लागू होगा।
- कनेक्टिव डेवलपमेंट प्रोजेक्ट लाएंगे
बड़े शहरों के मास्टर प्लान के साथ कनेक्टिंग सिटी का रोड नेटवर्क प्लान आने से वहां के लिए अलग से विकास के प्रोजेक्ट आएंगे। इसमें कमर्शियल, टूरिज्म, धार्मिक और मनोरंजन सहित अन्य स्थल विकसित किए जा सकें। इन रोड नेटवर्क एरिया में रोजगार बढ़ेंगे।
- ऐसा होगा फॉर्मूला
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने समग्र नगरीय विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार करने 10 आधारभूत बिंदु तय किए हैं। इनमें आस-पास की कनेक्टिविटी के साथ समग्र विकास पर फोकस है। इसके तहत मास्टर प्लान में शहरों के भीतर एक बॉयो डायवर्सिटी पार्क रखा गया है। इससे स्थानीय प्रजातियों को पर्याप्त स्थान मिल सके। शहर में ऑडिटोरियम या कन्वेंशन सेंटर, सुपर मार्केट, सामुदायिक पार्किंग भी रहेगी। आंतरिक सड़कों का विकास कर उन्हें मुख्य शहर से जोडऩे का प्रावधान होगा। औद्योगिक क्षेत्रों का प्रावधान नगर निवेश के अंदर परिधि क्षेत्र में ही होगा। अतिक्रमण वाले इलाकों के लिए भी प्रावधान किया जाएगा। कचरा प्रबंधन, जल-मल निकासी, बस स्टैंड आदि का विकास योजनाओं में स्पष्ट रूप से चिन्हांकन होगा। सामुदायिक पार्किंग के प्रावधान के साथ नगरीय क्षेत्र में स्थित छोटे सघन रास्तों एवं पैदल मार्गों को नक्शे पर मार्क किए जाएंगे।