- पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों की पढ़ाई- 13 जिले में 3 फीसदी बच्चे ही हुए शामिल- सरकारी स्कूलों के बच्चों का वाट्सऐप पर मूल्यांकन
भोपाल. कोरोना काल में सरकारी स्कूलों के बच्चों की पढ़ाई सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। सरकार के लाख प्रयासों के बावजूद भी स्थिति में सुधार नहीं है। शिक्षा विभाग ने बच्चों की पढ़ाई के लिए वाट्सऐप का सहारा लिया था। जब सरकार ने इसकी पढ़ाई का मूल्यांकन कराया तो स्थिति चिंताजनक मिली।
गांवों में बच्चों ने ऑनलाइन पढ़ाई में रुचि नहीं दिखाई। 33 जिलों में 10 फीसदी बच्चे भी मूल्यांकन में शामिल नहीं हुए। 13 जिले तो ऐसे रहे, जहां बच्चों की सहभागिता 3 फीसदी रही। 19 जिलों में 10 प्रतिशत से ज्यादा बच्चे वाट्सऐप के जरिए पढ़ाई की प्रक्रिया में शामिल हुए। वाट्सऐप बेस्ड असिसमेंट पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों की पढ़ाई पर किया गया था।
प्रदेश में छिंदवाड़ा का प्रदर्शन सबसे अच्छा
राज्य शिक्षा केंद्र ने मूल्याकंन में बच्चों की अरुचि को लेकर सभी जिलों को पत्र जारी कर कारण पूछा है। साथ ही ३३ जिलों के अफसरों को ऑनलाइन पढ़ाई में अधिक से अधिक बच्चों को शामिल करवाने के निर्देश दिए हैं। छिंदवाड़ा का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा है। वहां के पढ़ाई के तरीकों को अन्य जिलों से साझा करने को कहा गया है।
ऐसी थी प्रक्रिया
कोरोना काल में स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई बेहतर ढंग से हो, इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने वाट्सऐप आधारित मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू की थी। पहली से आठवीं तक के बच्चों से वाट्सऐप के जरिए हिंदी और गणित के प्रश्न पूछे गए। इन प्रश्नों को हल करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया गया था। जिन छात्रों ने चार से पांच दिन में प्रश्न हल किए, उन्हें प्रोत्साहित किया गया।
यहां 3 फीसदी बच्चे
प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, आगर-मालवा, शाजापुर, मंडला, धार, भिंड, झाबुआ, ग्वालियर, अनूपपुर, शिवपुरी, रतलाम, देवास जिलों में 3 फीसदी बच्चों ने ही दिखाई रुची।
यहां 10 फीसदी से ज्यादा
प्रदेश के छिंदवाड़ा, मुरैना, होशंगाबाद, पन्ना, नीमच, नरसिंहपुर, निवाड़ी, सिवनी, डिंडोरी, विदिशा, खंडवा, सिंगरौली, बड़वानी, जबलपुर, भोपाल, इंदौर, मंदसौर, सीहोर, हरदा जिले में 10 फीसदी बच्चों ने ही दिखाई रुची।