
MP News : राजधानी भोपाल समेत मध्य प्रदेश को देश के 6 राज्यों का साइबर ठग गिरोह टारगेट कर रहा है। बीते तीन साल में 34 करोड़ रुपए की ठगी अकेले भोपाल में ही की गई है। लेकिन, साइबर क्राइम का ट्रेंड बदलने और अलग - अलग लोकेशन की भूमिका आने से प्रदेश का साइबर सेल पस्त है, यही वजह है कि महज 10 फीसदी रकम ही पीड़ितों को वापस मिल पाई।
दरअसल, साइबर ठगों का नेटवर्क राज्यों के हिसाब से प्लान कर रहा है। मध्य प्रदेश खासतौर से भोपाल में ठगी करने वाले क्रिमिनल पूर्वोंत्तर के राज्यों की सिम का इस्तेमाल करते हैं। पीड़ित को फंसाने के बाद शिकार एक से दूसरे राज्य के नेटवर्क के हवाले कर ठगी करते हैं। किसी एक लोकेशन से अपराध नहीं होने से लंबी जांच खिंचती है, तब तक अपराधी सबूत और रकम ठिकाने लगाकर नए शिकार की तलाश में जुट जाते हैं। जैसे लोगों को फांसता कोई और है और राशि किसी दूसरे राज्य के खाते में भेजी जाती है। निकासी भी अन्य राज्य में किए जाने से मामला उलझ जाता है।
साइबर अपराधी एक जैसे पैटर्न पर अपराध नहीं करते, बल्कि समय के साथ ट्रेंड बदल देते हैं। जैसे इस समय बिजली के बिल, प्रतियोगी परीक्षाओं के एडमिट कार्ड, शेयर टे्रडिंग के नाम पर शिकार बना रहे हैं। खुद को बैंक अधिकारी, पुलिस, सरकारी एजेंसी, निवेश सलाहकार या ऑनलाइन कंपनी का कर्मचारी बताकर लोगों को फोन या मैसेज करते हैं। झांसे में आते ही रकम ड्रॉपर अकाउंट में पहुंच जाती है। फिर अलग-अलग राज्यों में इनके ट्रांजेशन होते हैं, जिससे पैसे का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
एडिशनल डीसीपी शैलेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि, पीड़ित को देर नहीं करना चाहिए। अपराध होते ही अगर जानकारी दी तो खाता फ्रीज कर रकम बचाई जा सकती है। अपराधियों को तलाशना भी आसान होता है।
-पहली कड़ी: पूर्वोंत्तर और सीमावर्ती राज्यों से फर्जी दस्तावेजों पर सिम कार्ड खरीदे जाते हैं।
-दूसरी कड़ी: राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और झारखंड में ठगी के कॉल सेंटर या गैंग सक्रिय रहते हैं।
-तीसरी कड़ी: बिहार, यूपी, पश्चिम बंगाल व अन्य राज्यों के ड्रॉपर खातों में रकम जमा कराई जाती है।
-चौथी कड़ी: महाराष्ट्र, मप्र समेत कई राज्यों के एटीएम से रकम तुरंत निकाल ली जाती है या अन्य खातों में भेज दी जाती है।
वहीं, भोपाल के मिसरोद थाना इलाके में बिजली बिल अपडेट कराने के बहाने रिटायर्ड बैंक कर्मचारी से 5.55 लाख रुपए और कोहेफिजा में 64 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस ने दोनों मामलों में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, बागली रोड निवासी 60 वर्षीय धनराज नंदनबार रिटायर्ड बैंक कर्मचारी हैं। 2 जुलाई को उनके मोबाइल पर एक मैसेज आया था, जिसमें बिजली बिल अपडेट नहीं कराने पर कनेक्शन काटने की चेतावनी दी गई थी। मैसेज में संपर्क करने के लिए एक मोबाइल नंबर भी दिया गया था।
धनराज ने जब उस नंबर पर कॉल किया तो आरोपी ने खुद को बिजली कंपनी का कर्मचारी बताया और वॉट्सऐप पर लिंक भेजा। ठग ने कहा, बिल अपडेट करने के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा और खाते से जुड़े विवरण दर्ज करने होंगे। धनराज ने बताए अनुसार फॉर्म भरा और डेबिट कार्ड से 12 रुपए का भुगतान भी कर दिया। इसके बाद आरोपी ने डेबिट कार्ड की पूरी जानकारी भरने को कहा, जिस पर धनराज को शक हुआ और उन्होंने फोन काट दिया। लेकिन अगले दिन उनके खाते से 5.55 लाख रुपए निकलने का मैसेज आया। ठगों ने लिंक के जरिए जानकारी हासिल कर रकम निकाल ली। इधर, कोहेफिजा थाना क्षेत्र में रणवीर सिंह को अज्ञात कॉलर ने झांसे में लेकर 64,800 रुपए की ठगी कर ली।