
Datia By election: दतिया उप चुनाव 2026 में प्रदेश के दोनों प्रमुख दलों की प्रतिष्ठा दांव पर है। बीजेपी और कांग्रेस, दोनों ही पार्टियों में दो प्रमुख नेताओं की छवि उम्मीदवारों से इतर है। हाल ये है कि उनके रुख पर ही हार जीत का दारोमदार है। बीजेपी के पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और कांग्रेस के अवधेश नायक भले ही प्रत्याशी नहीं है, तब भी इन दोनों पर ही दोनों दलों की नजरें टिकी है। हालांकि दोनों दलों के पास बड़े नेताओं की फौज है। बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी खुद गांव-गांव जाकर प्रचार कर रहे हैं। इसके बावजूद नरोत्तम मिश्रा और अवधेश नायक ही केंद्र बिंदु बने हुए हैं। इन दोनों नेताओं का रुख ही दतिया की भविष्य की सियासत तय करेगा।
कांग्रेस ने उठाए स्थानीय मुद्दे: लोहा कूटा समाज की व्यथा :
कांग्रेस ने दतिया शहर के कई अहम स्थानीय मुद्दे उठाए हैं। वार्ड क्रमांक 31 में रहने वाले लोहा कूटा समाज (घुमक्कड़ एवं विमुक्त समुदाय) के लोगों की पीड़ा साझा करते हुए भाजपा के विकास के दावों पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि लोहा कूटा समाज के इन लोगों को वर्षों से स्थायी आश्रय की तलाश है, उन्हें आज तक पट्टे नहीं मिले हैं। महिलाओं के लिए शौचालय तक नहीं हैं। शराब के नशे में लोग उन्हें प्रताड़ित करते हैं।
इधर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने शुक्रवार को ग्रामीण क्षेत्रों और शहर के कई वार्डों में सघन जनसंपर्क कर मतदाताओं से समर्थन मांगा। उन्होंने खटौला, राजापुर, मकोनी, खैरी, बड़ौनी, जिगना, निचरोली, चकरामसागर, गोङ्क्षवद नगर सहित दतिया नगर के वार्ड 15, 16, 26 और 32 में संपर्क अभियान चलाया तथा डांग करैरा में कार्यकर्ताओं की बैठक और नुक्कड़ सभाओं को संबोधित किया।
आशुतोष तिवारी ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं की पार्टी है, जबकि कांग्रेस परिवारवाद की राजनीति करती है। उन्होंने कहा कि वे क्षेत्र के लोगों के बेटा और भाई बनकर हर सुख-दुख में साथ खड़े रहेंगे।
उपचुनाव के प्रचार के बीच भाजपा के प्रदेश सह प्रभारी सतीश उपाध्याय ने दतिया स्थित पार्टी चुनाव कार्यालय में युवाओं से संवाद किया। उन्होंने कहा कि भाजपा की राजनीति सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा और जनसेवा का अभियान है। उन्होंने युवाओं को लोकतंत्र के महापर्व में सक्रिय भागीदारी निभाने और भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के पक्ष में जनसंपर्क बढ़ाने का आह्वान किया।
प्रचार की गहमागहमी के बीच दोनों दलों में दोनों प्रमुख स्थानीय नेताओं की भूमिका ही अहम बनी हुई है। भाजपा के कई नेताओं को पार्टी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी की हार-जीत की कहानी पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के इर्द-गिर्द दिखाई दे रही है। यही कारण है कि मिश्रा को भी फ्रंट पर खेलने की छूट दे रखी है। कमोवेश यही स्थिति कांग्रेस की है। लाख भलाई-बुराई सुनने के बावजूद पार्टी अवधेश नायक को ही दतिया के लिए प्रत्याशी घनश्याम सिंह के बाद पहली पंक्ति का स्थानीय नेता मानकर चल रही है। कांग्रेस को अपनी सीट बचाए रखने के लिए उनके खुले और असंदिग्ध समर्थन की दरकार है।