नोटबंदी का बुधवार को एक साल हो रहा है, लेकिन नोटबंदी और उसके बाद हुई परेशानियां लोगों के जेहन में आज भी ताजा हैं।
भोपाल। नोटबंदी का बुधवार को एक साल हो रहा है, लेकिन नोटबंदी और उसके बाद हुई परेशानियां लोगों के जेहन में आज भी ताजा हैं। रात में प्रधानमंत्री का भाषण, उसके अगले दिन से तीन दिन तक बैंक बंद। नोट बदलवाने और एटीएम से पैसे निकालने के लिए लंबी- लंबी लाइनें। दो-दो हजार रुपए निकालने के लिए घंटों की मशक्कत आज भी सबको याद है। बैंक खाते में लाखों रुपए होने के बावजूद कई लोगों ने एेसी तंगी पहली बार देखी। राजधानी में भी जिन लोगों के यहां इस दौरान शादियां या अन्य कार्यक्रम थे वे उसे याद कर आज भी सिहर जाते हैं।
समझ नहीं आ रहा था कार्ड बांटें या पैसों का इंतजाम करें
नोटबंदी के दौरान बैंकों और एटीएम के आगे लंबी लाइनें आम हो गई थीं। कई लोगों को बहुत कष्ट हुआ। इन्ही में से एक थे अरेरा कॉलोनी निवासी विशाल शर्मा। विशाल की छोटी बहन रूपाली की शादी भी नोटबंदी के १६ दिन बाद यानी 24 नवंबर हो हुई थी। विशाल बताते हैं कि सात नवंबर को शादी के कार्ड प्रिंट हुए थे। पापा भी उसी दिन ही बैंक से कैश निकालकर लाए थे। आठ नवंबर की शाम को अचानक नोटबंदी की घोषणा हो गई। जब हमने सुना कि पुराने नोट बंद हो गए हैं तो पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। उस पूरी रात हम सो नहीं पाए कि अब कैसे क्या होगा। अगले दिन हमने कैटररर्स, टेंट और गार्डन सहित तमाम लोगों को फोन लगाया तो सबका जवाब यही था कि उन्हें नए नोट ही चाहिए। मैं और छोटा भाई विराट कार्ड बांटना भूल कर पैसों के इंतजाम में जुट गए। रिश्तेदारों, दोस्तों यहां तक कि लड़के वालों से भी मदद के लिए कहा। सभी की मदद से शादी तक कुछ पैसों का इंतजाम हुआ और बिना बड़ी दिक्कत के शादी निपट गई।
मत याद दिलाओ वो दिन...
बे टी की शादी के लिए कई सपने देखे थे, लेकिन शादी के कुछ समय पहले ही नोटबंदी का भूचाल आ गया। उस समय की याद मत दिलाओ, वो पल याद करके रोना आ जाता है। नोटबंदी के बाद शादी की तैयारियों में जो परेशानी आई थी, उसे बयां करेंगे तो दो दिन भी कम पड़ेंगे। बस परमात्मा की मेहरबानी थी कि कई लोगों ने एेसे समय पर मसीहा बनकर मदद की, और शादी हो गई।
यह दर्द है पुतलीघर स्थित हनुमान मंदिर के महंत दुर्गादास का। उनकी बेटी पूजा की शादी १२ दिसम्बर को थी। शादी उन्हें उत्तराखंड में जाकर करनी थी। पुराने नोट चलना बंद हो गए, पैसे निकालने में भी कई पाबंदियां थीं। नोट बदलवाने के लिए बैंक की लंबी-लंबी लाइन में लगना पड़ता था, उसमें भी सीमा थी। कई बार तो एेसा हुआ परिवार कि लोग दिन भर लाइन में लगे और नंबर नहीं लगा। लेकिन कुछ लोगों ने एेसे मुश्किल भरे समय में मसीहा बन मदद की। आज भी वो दिन याद आते हैं, तो उस समय का मंजर, बैंकों की कतारे, परेशानियां आंखों के सामने घूमने लगती हैं।
उस समय तो बेकाबू हो गए थे बाजार के हालात, अब पटरी पर लौट रहा कारोबार लेकिन रफ्तार धीमी...
रियल एस्टेट पर असर
नोटबंदी से रोजगार घटा, छोटे शहरों-कस्बों का पलायन बड़े शहरों में होने लगा। इसका असर रियल एस्टेट सेक्टर पर भी पड़ा। समय के साथ धीरे-धीरे सुधार हुआ। इतने बड़े आर्थिक सुधारों में समय लगेगा।
मनोज सिंह मीक, प्रवक्ता, क्रेडाई, एमपी
व्यवस्था सुधरी
नोटबंदी के बाद कुछ समय तक ट्रांसपोर्ट उद्योग में भी समस्या आई लेकिन अब व्यवस्था में सुधार हो रहा है। आसानी से पेमेंट होने लगा है। बैंकों के हैप्पी कार्ड जारी करने के बाद समस्या सुधर गई। ई-पेमेंट भी आसानी से होने लगा है।
कमल पंजवानी, डायरेक्टर हर्ष ट्रांसपोर्ट कंपनी
पैसे का अभाव जारी
बाजार में नोटबंदी के बाद से रौनक नहीं लौटी है। बाजार अभी 50 फीसदी बैठा हुआ है। नकदी की समस्या से लेकर लोगों की परचेजिंग पॉवर कम हुआ है। इन हालातों को सुधरने में लंबा समय लगेगा। व्यापारियों को बैंकों से भी पूरा पैसा नहीं मिल पा रहा।
अनुपम अग्रवाल, महासचिव अभा उद्योग व्यापार मंडल
25% की गिरावट
जीएसटी एवं नोटबंदी के बाद कारोबार में 25 फीसदी से अधिक की गिरावट आई है। पहले कपड़े पर टैक्स नहीं था। सरकार ने इस पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगा दिया। बाजार अभी स्मूथली नहीं चल रहा। तंगी बनी हुई है। रिटर्न भरने की प्रक्रिया का सरलीकरण होना चाहिए।
श्याम बाबू अग्रवाल, अध्यक्ष राजधानी व्यवसायी संघ
30-50% बाजार ठंडा
नोटबंदी के बाद से 30 से 50 प्रतिशत बाजार ठंडा हो गया है। ग्राहकी कमजोर हो गई। दो-चार माह ज्यादा ही परेशानी हुई। परेशानी अभी खत्म नहीं हुई है। व्यापारियों को रिटर्न भरने में दिक्कत आ रही है। पोर्टल की प्राबल्म से टैक्स जमा नहीं हो पा रहे।
सतीश गंगराड़े, अध्यक्ष न्यू मार्केट व्यापारी संघ
50 प्रतिशत कारोबार
पिछले एक साल में सराफा बाजार मंदी के दौर में है। दूसरी इंडस्ट्री का काम भी धीमा हो गया है। एक्सट्रा मनी जो बाजार में आती है, उसमें रुकावट आ गई है। अकेले सराफा बाजार की बात करें तो नोटबंदी के बाद से बाजार में 50 प्रतिशत कारोबार रह गया है।
नरेश अग्रवाल, अध्यक्ष श्री सराफा एसो. भोपाल
रिटेल पर असर
शेयर बाजार की बात करें तो नोटबंदी से बाजार पर कोई असर नहीं हुआ। बाजार अभी भी ऑल टाइम हाई चल रहा है, लेकिन रिटेल बाजारों में असर हुआ है। ग्राहकी कम हुई। बाजार धीरे-धीरे पिकअप कर रहा है।
संतोष अग्रवाल, अध्यक्ष, भोपाल स्टॉक इन्वेस्टर एसो.
50% दुकानों पर स्वैप मशीनें लग चुकीं
भोपाल. नोटबंदी के बाद से विभिन्न बैंकों ने तेजी से कैशलेस की तरफ ध्यान दिया। राजधानी की बात करें तो यहां लगभग 5000 बड़े व्यापारी है। इनमें से 50 प्रतिशत से अधिक प्रतिष्ठानों पर स्वैप मशीनें लग चुकी है। हालांकि इन मशीनों के माध्यम से बैंक व्यापारियों से 1 से 2 प्रतिशत तक एमडीआर चार्ज वसूल रहे हैं।
फिर नकदी पर लौटे
कैशलेस व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने भीम एप, पेटीएम जैसी सुविधाएं प्रदान की हैं। मार्केट एक्सपर्ट कहते हैं कि नोटबंदी के शुरुआती दिनों में 90 फीसदी डिजिटल पैमेंट होने लगा था, लेकिन धीरे-धीरे कारोबार में नकदी का व्यवहार होने लगा। नोटबंदी के बाद से ऑनलाइन पैमेंट में इजाफा हुआ है। ऑनलाइन पैसा व्यापारी को मिलने के बाद यह पैसा कंपनी को एनईएफटी करके भेजा जाता है। इसमें 10 फीसदी की ग्रोथ बताई जा रही है।