
Devkinandan Thakur- विख्यात कथावाचक व धर्माचार्य देवकीनंदन ठाकुर Devkinandan Thakur ने रात्रि में हो रही शादियों को अनुचित बताया है। उन्होंने कहा कि यह दैत्य प्रणाली से होते हैं और दिन के विवाह देव प्रणाली से होते हैं। देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि आजकल रात में विवाह का चलन बढ़ गया है लेकिन यह प्रथा बंद होनी चाहिए। भोपाल के बावडिय़ा कला के रूद्राक्ष किंगस्टन परिसर में चल रही भागवत कथा में उन्होंने रात में की जा पूजा पर भी सवाल उठाया। देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि कुछ विशेष अवसरों पर ही रात्रि पूजन की जा सकती है। उन्होंने देर रात तक मंदिर खोले जाने पर भी आपत्ति जताई। कथावाचक व धर्माचार्य देवकीनंदन ठाकुर ने भीड़ देखकर यह काम किया जा रहा है। यह अनुचित है। उन्होंने बच्चों को अच्छे संस्कार देने की भी बात कही।
भागवत कथा में देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि गोविंद कभी अपने काम को पीछे नहीं छोड़ते। उन्होंने कहा कि जिस दिन मन भगवान के चरणों में लग जाए, वही सच्ची मुक्ति है। मन संसार में ही लगा हुआ है तो समझो तुम बंधे हुए हो। उन्होंने कहा कि भगवान के ऊपर अपनी मर्जी नहीं थोपनी चाहिए।
कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर ने बच्चों को अच्छे संस्कार देने की सीख देते हुए कहा कि संस्कार न मिलने से बच्चे नशा कर रहे हैं। भारत का भविष्य अगर इस तरह हो जाएगा तो भारत विश्व गुरु कैसे बनेगा। बच्चे संस्कारी न हो तो आपके करोड़ों कमाने के बाद भी वह काम नहीं आएगा। बच्चों को संस्कार देंगे तभी कल्याण होगा। उन्होंने कहा कि बिना गुरु के गोविंद नहीं मिलते। जीवन में गुरु का होना जरूरी है। उन्होंने कर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि न लाभ आपके हाथ है न हानि, न यश आपके हाथ है न अपयश, न अपना जन्म आपके हाथ है न मृत्यु। आपके हाथ बस आपका अपना कर्म ही है।
भागवत कथा में बड़ी संख्या में शामिल श्रद्धालुओं के सामने धर्माचार्य देवकीनंदन ठाकुर ने दैत्य प्रवृत्तियों से जोड़कर रात में हो रही शादियों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि रात्रि का समय दैत्यों का होता है। इसलिए हमें अपने बच्चों के विवाह कभी भी रात्रि में नहीं करना चाहिए। देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि रात्रि विवाह के कारण ही पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ रहे हैं। अधिकांश विवाह रात में ही हो रहे हैं जिससे दांपत्य जीवन में टकराव बढ़ता है।
कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि कुछ लोग रात्रि में पूजा करने के लिए कहते हैं, जबकि विशेष रात्रियों को छोड़कर कभी भी रात्रि में पूजा नहीं करनी चाहिए। शिवरात्रि और नवरात्रि जैसे कुछ अवसरों पर ही रात्रि में पूजा का विधान है। देवकीनंदन ठाकुर ने देर रात तक मंदिर खोले जाने को भी अनुचित करार दिया। उन्होंने कहा कि आजकल भीड़ देखकर रात तक मंदिर खोले जा रहे हैं, जो जरा भी ठीक नहीं है।