
भोपालः विधानसभा चुनाव से पहले नर्मदा परिक्रमा के जरिये धार्मिक पद यात्रा करने वाले पूर्व सीएम और भोपाल सीट से कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह ने शनिवार को अपनी निर्वाचन लोकसभा सीट पर राजनीतिक पदयात्रा की शुरुआत की। इस यात्रा के जरिये दिग्विजय अपने निर्वाचन क्षेत्र के हर गली-मौहल्ले से पैदल गुजरकर क्षेत्र के लोगों से जनसंपर्क कर रहे हैं। दिग्विजय ने इस पद यात्रा की शुरुआत राजधानी के पुराने शहर की मध्य विधानसभा सीट से की है।
दिग्विजय की बड़ी रणनीति
इस पद यात्रा को दिग्विजय की बड़ी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि, वो इसके जरिये डोर टू डोर जनसंपर्क करेंगे और लोगों के सवालों को सुनकर उनसे एक ना एक वादा करके लोगों का समर्थन जुटा रहे हैं। दिग्विजय सिंह का ये पैदल मार्च कमला पार्क से शुरु हुआ जो, पुराने शहर के बुधवारा, इस्लामपुरा, छावनी, जिंसी, होता हुआ स्टेट बैंक कॉलोनी-शब्बन चौराहे पर संपन्न होगा। इससे पहले शुक्रवार को भी दिग्विजय सिंह पुराने भोपाल इलाके ही इमामीगेट, नूरमहल, मरघटिया घाट, इस्लामी दरवाज़ा, जेपी नगर, क़ाज़ी कैम्प, शीतला माता चौराहा होते हुए होली चौराहा तक जनसंपर्क कर चुके हैं।
धार्मिक के बाद दिग्विजय की राजनीतिक पद यात्रा
इससे पहले दिग्विजय सिंह नर्मदा परिक्रमा के दौरान पद यात्रा कर चुके हैं, लेकिन वो एक धार्मिक यात्रा थी। हालांकि, इस धार्मिक यात्रा के साथ-साथ उन्होंने पूरे पथ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आम जनता से मुलाक़ात भी की थी, जिससे पंद्रह साल से सत्ता से बाहर रही कांग्रेस के लिए काफी ज़मीन तैयार हुई थी। अब जानकार उनकी इस यात्रा को राजनीतिक पद यात्रा नाम दे रहे हैं। उनका मानना है कि, धार्मिक यात्रा होने के कारण दिग्विजय ने जरा भी राजनीतिक बात नहीं की थी, तब भी कांग्रेस को उससे राजनीतिक लाभ मिला। अब ये पद यात्रा तो राजनीतिक ही है।
रैली में नहीं शामिल होंगे कंप्यूटर बाबा
दिग्विजय सिंह की रैली की शुरुआत होने से पहले ये बातें भी सामने आ रही थीं कि, उनके समर्थन में आज कंप्यूटर बाबा भी रैली में शामिल होकर मोर्चा संभालेंगे। वो दिग्विजय के साथ रहकर उनके लिए प्रचार करेंगे। साथ ही उनके साथ बड़ी संख्या में संत समाज भी शामिल होगा, जो मोदी सरकार की धर्म विरोधी नीतियों के बारे में बताएगा। हालांकि, ऐसा हुआ नहीं। कांग्रेस प्रवक्ता आनंद तारण ने कहा कि, कंप्यूटर बाबा दिग्विजय सिंह के पक्ष में प्रचार करेंगे जरूर, लेकिन वो इस रैली में शामिल नहीं होंगे। वो संतों के साथ मिलकर एक अन्य यात्रा निकालेंगे, जो जिले के मुख्य इलाकों से गुजरते हुए पिछली सरकार की कु रीतियां गिनाएगी साथ ही, दिग्विजय के लिए प्रचार करेगी।