
Bhopal news: मध्यप्रदेश में भोपाल विकास योजना मास्टर प्लान-2047 के प्रारूप में ग्राम पंचायत छावनी पठार, तहसील हुजूर के खसरा नंबर 47 को औद्योगिक उपयोग के लिए प्रस्तावित किए जाने से ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का सवाल है कि जिस जमीन पर हजारों मतदाता निवास कर रहे हैं, जहां पंचायत भवन कर और नल-जल कर वसूल रही है तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान भी बनाए जा चुके हैं, उसे औद्योगिक उपयोग के लिए प्रस्तावित करने से पहले मौजूदा आबादी और सरकारी योजनाओं की स्थिति का आकलन किया गया या नहीं? इसी मुद्दे को लेकर सैकड़ों ग्रामीण कलेक्टोरेट पहुंचे, कलेक्टर के नाम आपत्ति-पत्र सौंपकर प्रस्तावित भू-उपयोग की दोबारा जांच कराने की मांग की।
कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों ने कहा मास्टर प्लान के प्रस्ताव का असर जमीन के उपयोग तक सीमित नहीं रहेगा। क्षेत्र में रह रहे परिवारों के आवास, बुनियादी सुविधाओं और भविष्य पर भी पड़ सकता है। इस दौरान देवेंद्र कुमार, लखन सिंह ठाकुर, रूपमती अहिरवार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला पुरुष कलेक्ट्रेट पहुंचे।
ग्रामीणों की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में खसरा नंबर 47 से संबंधित क्षेत्र में करीब नौ हजार मतदाता निवास करते हैं। ग्रामीणों का कहना है यहां लोगों को शासन की विभिन्न सुविधाएं मिल रही हैं। ग्राम पंचायत नल-जल कर भी वसूलती है। ऐसे में क्षेत्र के मौजूदा आवासीय स्वरूप और प्रस्तावित औद्योगिक भू-उपयोग के बीच तालमेल को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है मास्टर प्लान को अंतिम रूप देने से पहले आबादी, सुविधाओं को किस तरह ध्यान में रखा गया है।
ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत में करीब 900 लोगों को आवास योजना के लिए पात्र माना गया है। लगभग 190 हितग्राहियों के मकानों का निर्माण हो चुका है। दावा है कि ये मकान खसरा नंबर 47 पर स्थित हैं। उन्होंने मांग की कि किसी भी अंतिम निर्णय से पहले आवासों की स्थिति, हितग्राहियों के अधिकार और सरकारी निवेश से जुड़े पहलुओं की जांच की जाए।
कलेक्टर को सौंपे गए आपत्ति-पत्र में ग्रामीणों ने खसरा नंबर 47 के प्रस्तावित भू-उपयोग की दोबारा जांच कराने, जनहित को प्राथमिकता देते हुए उचित निर्णय लेने की अपील की है। मामले में प्रशासन के समक्ष सवाल यह है कि प्रस्तावित औद्योगिक भू-उपयोग तय करते समय मौजूदा आबादी, निर्मित मकानों, पंचायत की सुविधाओं का कितना आकलन किया गया है।