भोपाल

बच्चों का भी करें सीरो सर्वे, स्कूल में सोशल डिस्टेंसिंग से नहीं हो समझौता

पत्रिका टॉक शो: स्कूल खोलने को लेकर टीचर्स और पैरेन्ट्स दोनों सहमत, अब स्कूल बंद रखना ठीक नहीं
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Aug 29, 2021
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भोपाल। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच पॉजीटिव केस कम होने से सरकार ने एक सितंबर से 6वीं से 12वीं तक कक्षाएं लगाने का निर्णय कर लिया है। पत्रिका ने टॉक शो कर पैरेन्ट्स, डॉक्टर्स और टीचर्स से जाना कि स्कूल किस तरह से खोले जा सकते हैं। सिर्फ ऑनलाइन क्लासेस चलने से पढ़ाई का किस तरह नुकसान हो रहा है। टीचर्स के साथ पैरेन्ट्स भी स्कूल खोलने को लेकर समहत नजर आए। पैरेन्ट्स का कहना था कि स्कूल खोलने से पहले बड़ों की तरह बच्चों का भी सीरो सर्वे होना चाहिए। इससे बच्चों में कोविड संक्रमण की स्थित स्पष्ट हो जाएगी। इसके बाद ही पूरी क्षमता के साथ स्कूल खोले जाने चाहिए।

सरकार भी दिखाए सख्ती
मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी के अनुसार इंजीनियरिंग, एमबीए, एमबीबीएस जैसे कोर्स की भी सिर्फ ऑनलाइन पढ़ाई हो रही है, प्रैक्टिकल क्लासेस हो ही नहीं पा रही। वैक्सीन से स्कूल खोलने का सीधा संबंध नहीं है। पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर कुछ स्कूल पूरी तरह से खोले जाने चाहिए। अभी कुछ बच्चे और पैरेन्ट्स दोनों कंफर्ट जोन में चले गए हैं, बच्चे ना स्कूल आना चाहते हैं ना ही पैरेन्ट्स उन्हें भेजना चाहते हैं। सरकार को सख्त निर्णय लेना होगा।

वहीं, इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल चित्रा सुब्रहमण्यम ने कहा कि एक या दो दिन स्कूल खोलने से काम नहीं चलेगा। हमें स्क्रीन एडिक्शन का तोड़ भी निकालना होगा। अभी कई बच्चे ऑडियो ऑफ कर स्क्रीन के सामने बैठे रहते हैं, जबकि बच्चे सुन-सुनकर ही सीखते है। बच्चे घर से बाहर घूमने, दोस्त-रिश्तेदारों के घर जा सकते हैं तो स्कूल क्यों नहीं आ सकते। यदि तीन दिन ऑनलाइन और तीन दिन ऑफलाइन क्लास लगेगी तो फायदा नहीं होगा।

स्कूल में लंच सेशन नहीं होना चाहिए
गायनोकोलॉजिस्ट डॉ. दीप्ति गुप्ता के अनुसार बच्चों का फिजिकल और मेंटल डेवलपमेंट रुका है, इम्युनिटी भी कमजोर हो गई है। वे दिनभर टीवी के सामने बैठे रहते हैं। शुरुआती पांच साल में उनका ब्रेन डेवलमेंट होता है। बच्चों टीचर की बात मानते हैं, ऐसे में यदि वे स्कूल जाते हैं तो मास्क भी लगा सकते हैं। एक क्लास में 60 बच्चे बैठेंगे तो सोशल डिस्टेसिंग नहीं होगी। इसलिए स्ट्रैन्थ कम होना चाहिए। स्कूल के समय को भी कम रखना चाहिए। लन्च टाइम जैसे सेशन को भी खत्म किया जाना चाहिए, क्योंकि बच्चे मास्क निकालकर साथ बैठेंगे तो खतरा रहेगा। नीता शर्मा का कहना है कि अभी नर्सरी से चौथी क्लास तक नहीं खुलना चाहिए। वे सोशल डिस्टेसिंग नहीं रख पाएंगे। ऑनलाइन क्लासेस से स्क्रीन टाइम बढ़ा है, साथ ही फिजिकल एक्टिविटी खत्म सी हो गई है। बड़े होते बच्चों के लिए एक्सरसाइज जरूरी है, खेलेंगे नहीं तो ग्रोथ रूक जाएगी। प्राइमरी एजुकेशन बच्चों का बेस मजबूत करती है।

दो शिफ्ट में लगने चाहिए स्कूल
आइपीएस की वाइस प्रिंसिपल दीप्ति सिंह ने कहा कि गेम्स पीरियड के बिना भी क्लासेस लगाई जा सकती हैं। मेन सब्जेक्ट के साथ स्कूल खुलें। प्राइमरी में एक या दो पीरियड ही हो लेकिन बारहवीं तक क्लासेस फूल स्ट्रैन्थ के साथ शुरू होना चाहिए। दो शिफ्ट में स्कूल लगाकर सोशल डिस्टेसिंग मेंटनेंट कर सकते हैं। अभिभावक महिमा दुबे का कहना है कि दूसरी लहर में हर घर में कोई ना कोई प्रभावित हुआ है। ऐसे में बच्चे भी संक्रमण की चपेट में आए ही होंगे। बच्चों का भी सीरो सर्वे होना चाहिए। इससे उनके इम्युनिटी लेवल का पता चलेगा। अभी पैरेन्ट्स बाहर जाते ही हैं, इससे बच्चे एक्सपोज तो हो ही रहे हैं। सिर्फ स्कूल जाने में खतरा कैसे हो सकता है।

लिखने की आदत खत्म होती जा रही है
भावना गौतम का कहना है कि बच्चों की राइटिंग स्किल प्रभावित हुई है। हिंदी-संस्कृत जैसे सब्जेक्ट तो वे सीख ही नहीं पा रहे। पहले पीटीएम में बच्चों के बारे में जानने को मिलता था। अब बच्चों की परफॉर्मेंस के बारे में पता ही नहीं चल पाता। एजुकेशन फॉर ऑल अब सिर्फ इंटरनेट फेसिलिटी वाले बच्चों तक सीमित हो गया है। स्कूल खुलना ही चाहिए। वहीं, एक अन्य अभिभावक आशीष मिश्रा इससे सहमत नहीं है। उनका कहना है कि पब्लिक प्लेस और घर की सेफ्टी में फर्क होता है। बाहर बच्चे मल्टीपल एक्सपोज होते हैं। अब मार्केट में हर जगह भीड़ है तो एजुकेशन को अलग नहीं रखा जा सकता। स्कूल खुलना चाहिए, लेकिन प्राइमरी स्कूल अभी बंद ही रहना चाहिए क्योंकि बच्चे कोविड गाइडलाइन को नहीं समझते। इससे उन्हें खतरा हो सकता।

Updated on:
29 Aug 2021 01:30 am
Published on:
29 Aug 2021 01:15 am