2 जुलाई 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आ गए ‘प्रमोशन’ के नए नियम, एमपी में हजारों पात्र कर्मचारी हो गए रिटायर, छलका दर्द

Promotion in mp: कई सरकारी कर्मचारी बिना प्रमोशन के ही रिटायर हो गए है। प्रमोशन के नए नियमों के बावजूद उनको किसी तरह का फायदा नहीं हुआ है।
2 min read
Google source verification
Employees Promotion: सरकार ने तैयारी शुरू कर दी (Photo Source: AI Image)

Employees Promotion: सरकार ने तैयारी शुरू कर दी (Photo Source: AI Image)

Employees Promotion: एमपी सहित भोपाल शहर में पिछले दस सालों से कर्मचारियों की पदोन्नति पर लगी रोक हटाने के लिए सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है, नए नियम बनाए गए है, लेकिन पिछले दस सालों में हजारों कर्मचारी पात्र होने के बाद भी बिना पदोन्नति के रिटायर हो गए है।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पदोन्नति पर न्यायालय ने पहले भी कोई रोक नहीं लगाई थी, जो लोग कोर्ट जा रहे थे, उन्हें प्रमोशन मिल रहा था, बल्कि शासन ने ही जान बूझकर प्रमोशन नहीं किए, जिसका खामियाजा अधिकारी कर्मचारियों को भुगतना पड़ा है। दूसरी ओर पिछले एक दो साल में पात्र होते हुए भी बिना प्रमोशन के रिटायर हुए कर्मचारी खुद को ठगा सा महसूस कर रहे है।

30 साल की सेवा में सिर्फ एक प्रमोशन

शाहजहानाबाद निवासी सहायक ग्रेड 2 से रिटायर हुए आरिफ अली खान नगरीय प्रशासन विभाग से इसी साल रिटायर हुए है। उनका कहना है कि उनकी 30 साल की सेवा अवधि रही, इस दौरान वे एक बार प्रमोट हुए थे, और दूसरी बार प्रमोशन के लिए पात्र थे, लेकिन प्रमोशन में आरक्षण का मामला आने के बाद शासन ने पदोन्नति बंद कर दी थी, लिहाजा रिटायरमेंट तक उनका प्रमोशन नहीं हो पाया। दूसरी ओर पेंशन में भी तृतीय समयमान, वेतनमान का लाभनहीं मिल पाया, क्योकि 30 साल में 14 दिन कम थे।

हर साल दस हजार से अधिक कर्मचारी होते हैं रिटायर

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि प्रदेश में हर साल विभिन्न विभागों से दस हजार से अधिक कर्मचारी रिटायर होते हैं। इस तरह प्रदेश में पिछले दस सालों में एक लाख कर्मधारी बिना पदोन्नति के ही रिटायर हो गए थे।

रिटायर हो गए लेकिन नहीं मिला प्रमोशन

पीडब्ल्यूडी से फरवरी 2026 में रिटायर हुए तुलसी नगर निवासी मोहन अय्यर ने बताया कि वे सहायक ग्रेड 2 थे और प्रमोशन के लिए पात्र थे और अगर प्रमोशन मिलता तो सहायक ग्रेड 1 होते. लेकिन रोक लगने के कारण उन्हें लाभ नहीं मिल पाया। करोंद निवासी एफबी सिंह ने बताया वे फूड एंड ड्रग में टेक्निशियन के पद पर थे। 40 साल की सेवा में एक पदोन्नति मिली थी, जबकि 2016 से ही हमारे यहां पद खाली था, जिसके लिए पात्र भी था लेकिन बेन लगने के कारण प्रमोशन नहीं हो पाया।

कर्मचारियों के साथ छलावा

तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने से कहा कि पिछले दस सालों से शासन ने कर्मचारियों के साथ छलावा किया है। शासन ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि पदोन्नति पर कोई रोक नहीं है, जब पहले ही रोक नहीं है तो पिछले दस सालों में कर्मचारियों से कर्मचारियों को क्यों वंचित रखा गया। जून 2025 में भी पदोन्नति नियम बने और पुराने मुद्दों के आधार पर रोक लगी। न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के बाद भी अगर पदोन्नति सरकार दे रही है तो यह स्वागत योग्य है।