जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी होता है हानिकारक, ये चीज हो सकती है डेमेज-
भोपालः गर्मियों मे डिहाइड्रेशन होने पर चिकित्सकों द्वारा आमतौर पर मरीज को सलाह दी जाती है कि, उसे रोजाना अधिकतम दो से तीन लीटर पानी चाहिए। हर व्यस्क व्यक्ति को रोजाना कम से कम डेढ़ से दो लीटर पानी पीना जरूरी है। इससे कम पानी पीने पर डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। ये बात तो हम सभी जानते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि, जिस तरह कम पानी पीने से डिहाइड्रेशन होता है, उसी तरह ज्यादा पानी पीने से हाइड्रेशन की समस्या हो जाती है।
इन लोगों को रहता है हाइड्रेशन का ज्यादा खतरा
हाइड्रेशन होने पर रक्त में सोडियम का का स्तर काफी तेजी से गिर जाता है। जिसकी वजह से दिमाग पर सूजन आ सकती है। हालांकि, ऐसा किसी तंदुरुस्त व्यक्ति के केस में बहुत कम ही होता है। आमतौर पर हाइड्रेशन का खतरा बच्चों, बुजुर्गों या कोई संवेदनशील व्यक्ति पर ज्यादा होता है। औसत से ज्यादा मात्रा में पानी पीने से शरीर में मौजूद सोडियम स्तर तेजी से गिरावट आ जाती है। इसके परिणाम स्वरूप व्यक्ति को थकान, नाक बहने, उल्टी या मितली जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।
शरीर के लिए सोडियम का महत्व
हेल्थ एक्सपर्ट की माने तो रक्त में सोडियम लेवल सामान्य से कम होने पर हाइपोनेट्रिमिया नामक समस्या हो सकती है। सोडियम एक इलेक्ट्रोलाइट है और यह कोशिकाओं के अंदर और आसपास पानी की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद करता है। जब कोई बहुत अधिक पानी पीता है, तो यह शरीर में पानी के स्तर में वृद्धि का कारण बनता है और कोशिकाएं सूखने लगती हैं। यह दिमाग की सूजन के साथ साथ कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकती है।
ओवर हाइड्रेशन
राजधानी भोपाल के निजी अस्पताल में कार्यरत डॉ. शेलेश मित्रा के मुताबिक, 'ओवर हाइड्रेशन एक तरह की आदत है, जिसे आप पानी का नशा भी मान सकते हैं। ऐसी परिस्थिति में पीड़ित के शरीर में नमक और अन्य इलेक्ट्रोलाइट्स का घोल बहुत पतला हो जाता है।सामान्य रूप से पानी पीने पर व्यक्ति का मूत्र पारदर्शी पीले रंग का होता है। हालांकि, कई लोगों का ये भी मानना है कि, मूत्र का पारदर्शी होना हाइड्रेशन कि निशानी है। बिना किसी रंग के मूत्र होने पर ये माना जाता है कि, व्यक्ति अधिक मात्रा में पानी पी रहा है।' हाइड्रेशन की समस्या उत्पन्न होने पर व्यक्ति को कई तरह की तकलीफों से भी गुज़रना पड़ सकता है, इसलिए हमेशा इन लक्षणों और संकेतों को समझते हुए चिकित्सक से परामर्श करें।