Health news: डॉक्टरों के अनुसार, बीच में इलाज बंद करने से ही एमडीआर-टीबी हो रही है। भोपाल में 12500 से अधिक टीबी मरीज हैं।
Health news: टीबी के बैक्टीरिया अब और भी घातक होते जा रहे हैं। भोपाल में मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) के साथ अब एक्सटेंसिवली ड्रग रेजिस्टेंट' (एक्सडीआर) टीबी के बढ़ते मामले स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा रहे हैं। ऐसे टीबी के बैक्टीरिया पर दवाएं बेअसर हो रही हैं। निक्षय पोर्टल के आंकड़े के अनुसार, प्रदेश में सबसे अधिक भोपाल में टीबी के मरीज हैं और इस खतरनाक बैक्टीरिया से यहां सबसे अधिक लोग मर भी रहे हैं। साल में टीबी से 332 लोगों की मौत हो चुकी है। मरने वालों में ज्यादातर एमडीआर टीबी के मरीज होते हैं। हर चौथे मरीज पर दवाएं बेअसर हो रही हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, बीच में इलाज बंद करने से ही एमडीआर-टीबी हो रही है। भोपाल में 12500 से अधिक टीबी मरीज हैं। पिछले एक वर्ष में भोपाल में लगभग एक हजार ड्रग रेजिस्टेंट मामले सामने आए हैं। इसके 40 से 50 प्रतिशत रोगियों की मौत हो जाती है। अब एक्सडीआर-टीबी के मामले मिलने से चिंता और गहरा गई है। एक्सडीआर-टीबी में दूसरी श्रेणी की महंगी दवाएं भी काम नहीं करती। बायोलॉजिकल बम की तरह इसके एक संक्रमित मरीज साल में 10 से 15 स्वस्थ लोगों में टीबी फैलाते हैं।
टीबी की सामान्य दवाएं लेने के 2 महीने बाद भी सुधार नहीं हो रहा है, वजन लगातार गिर रहा है और बलगम में खून आ रहा है, तो तुरंत 'निक्षय केंद्र' जाकर 'ड्रग सेंसिटिविटी टेस्ट' (डीएसटी) कराएं। देरी जानलेवा हो सकती है। डॉ. लोकेन्द्र दवे, श्वास रोग विभागाध्यक्ष, गांधी मेडिकल कॉलेज