भोपाल

E Tender scam: इंदौर के ठेकेदारों को किया तलब, पूछताछ जारी

E Tender scam : एंटारस के वाइस प्रेसिडेंट गिरफ्तार, ठेकेदारों को देते थे अहम जानकारी

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May 03, 2019
E Tender scam: इंदौर के ठेकेदारों को किया तलब, पूछताछ जारी

भोपाल. ई-टेंडर घोटाले में ईओडब्ल्यू ने बेंगलुरू की एंटारस सिस्टम्स प्रालि सॉफ्टवेयर कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट मनोहर एमएन को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। यह पांचवें आरोपी की गिरफ्तारी है। मनोहर को शनिवार को कोर्ट में पेश कर पुलिस रिमांड मांगी जाएगी।

एंटारस, एसईडीसी और ऑस्मो आइटी सॉल्यूशंस कंपनी से जब्त डाटा की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट और 19 अप्रेल से जारी पूछताछ के बाद ईओडब्ल्यू ने मनोहर की मिलीभगत पाई है। मनोहर से 14 दिन तक पूछताछ हुई है। सीईओ सुरेश के. से भी पूछताछ जारी है।

मनोहर को ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के डाटा को सुरक्षित न रखने और गोपनीयता भंग करने का आरोपी बनाया गया है। एंटारस के तीन पदाधिकारियों से भी 19 अप्रेल से पूछताछ की जा रही है।

ये लगाई गई धाराएं

धारा 120-बी, 420, 468, 471 भादंवि एवं आइटी एक्ट 2000 की धारा 66 एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 की धारा 7 सहपठित धारा 13(2) की विवेचना के दौरान मनोहर एमएन की इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के आरोपियों, आरोपी विनय चैधरी, वरूण चतुर्वेदी के साथ अपराध में संलिप्तता पाई गई।

सॉफ्टवेयर में मिली हैं कई खामियां

ई ओडब्ल्यू को कंपनी के सॉफ्टवेयर में खामियां मिली हैं, जिससे टेंपरिंग संभव थी।
सबसे बड़ी खामी एक्सल शीट और वर्ड फाइल में टेंडर अपलोड करने में थी। इनसे बिड डॉक्यूमेंट में हेरफेर करना आसान था।

यदि पीडीएफ फॉर्मेट में टेंडर अपलोड होते तो छेडख़ानी संभव न होती, लेकिन कंपनी ने इसे सुधारना तो दूर ध्यान तक नहीं दिया, उलट कंपनी के ही लोग इसमें सहयोगी बन गए। जांच अधिकारियों को आशंका है कि सॉफ्टवेयर में यह विकल्प संभवत: गड़बड़ी करने की मंशा से ही रखा गया।

ऐसे करते थे सहयोग

मनोहर, विनय, वरुण को ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल की यूजर आइडी और पासवर्ड मालूम थे। इसके जरिए वे ई-टेंडर्स की बिड राशि में छेड़छाड़ कर हजारों करोड़ रुपए के घोटाले करते थे। वहीं, एंटारस के सॉफ्टवेयर में तकनीकी खामियां थीं, जिससे ऑस्मो आईटी सहित अन्य कंपनियों ने एंटारस कंपनी के सॉफ्टवेयर में सेंध लगा रखी थी। इसकी जानकारी मनोहर को थी।

मनोहर के संपर्क में इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन, ऑस्मो आइटी कंपनी और ठेकेदार तक थे। ऑस्मो के संचालक, विनय, वरुण और सुमित के साथ निलंबित ओएसडी एनके ब्रम्हे की हरकतों की जानकारी मनोहर को थी। मनोहर ही इसे शह दे रहे थे।

Published on:
03 May 2019 10:31 am
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