
भोपाल. विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ‘पत्रिका’ ने शिवराज सरकार के मंत्रियों से उनके काम-काज और उपलब्धि को लेकर सात सवाल पूछे। उन्होंने खुद को अपने काम से संतुष्ट बताया, लेकिन नंबर देने से बचते रहे।
ज्यादातर ने कहा कि नंबर तो जनता और पार्टी ही काम के आधार पर देगी। वहीं, वे आरक्षण और सवर्ण आंदोलन पर खुलकर कुछ नहीं कह सके। कुछ मंत्रियों ने आर्थिक आधार और सभी को समानता की बात जरूर कही। ज्यादातर मंत्री इस मुद्दे पर बोलने से बचते रहे।
ये थे सात सवाल
1. क्या सवर्ण आंदोलन को चुनावी चुनौती मानते हैं?
2. मंत्री के रूप में आपका सबसे बड़ा काम?
3. कोई एक ऐसा काम, जो आप मंत्री रहते नहीं कर पाए?
4. क्या आप अपने परिवार को राजनीति में लाने के पक्षधर हैं?
5. राजनीति में भी रिटायरमेंट की उम्र होनी चाहिए?
6. आरक्षण को लेकर आपकी राय क्या है। रहना चाहिए या खत्म होना चाहिए?
7. क्या आप अपने काम से संतुष्ट हैं? खुद को 10 में से कितने नंबर देंगे?
ये दिया जवाब - माया सिंह, मंत्री, नगरीय विकास एवं आवास
1. कोई जवाब नहीं।
2. अवैध कॉलोनियों को वैध करना। क्षेत्र में 298 में से 152 अवैध से वैध के लिए पात्र पाई।
3. ऐसा कोई काम नहीं। बहुत काम किए हैं। डिस्पेंसरी लाना, पानी की टंकी बहुत काम हैं।
4. कोई अपनी योग्यता के आधार पर काम करता है तो करना चाहिए। पार्टी उसे फिर आगे बढ़ाती है।
5. जब तक व्यक्ति मानसिक व शारीरिक रूप से सक्षम है, उसे काम करना चाहिए।
6. कोई जवाब नहीं।
7. नंबर तो जनता ही दे।
इन्ही सवालों पर जयंत मलैया - मंत्री, वित्त ने कहा -
1. कोई असर नहीं है।
2. सिंचाई पांच गुना की। वित्तीय प्रबंधन संभालना बेहद महत्वपूर्ण काम रहा है।
3. जो नहीं कर पाया हूं, ऐसा कोई काम मुझे याद नहीं।
4. ये व्यक्ति की मर्जी पर निर्भर है कि वो राजनीति में आए या नहीं।
5. राजनीति में रिटायरमेंट भी व्यक्ति की मर्जी पर निर्भर करता है। वो चाहे तो हो और न चाहे तो रिटायर
न हो।
6. एक ही बात कहूंगा, सबको न्याय मिलना चाहिए।
7. खुद को नंबर मैं नहीं देता। नंबर जनता देगी।