- जांच रिपोर्ट में देरी हो तो उपभोक्ता बीते छह माह की औसत खपत के आधार पर जमा कर सकता है बिल
भोपाल. कोलार के शैलेष मिश्रा के यहां अप्रैल में जब मीटर रीडर पहुंचा तो वह खपत देखकर चौंक गया। उसने मिश्रा को बुलाया और बताया कि मीटर में एक माह के दौरान ही 6148 यूनिट खपत कर दी। यानि रोजाना 254 यूनिट बिजली खपत हुई। प्रतिमाह 200 से 250 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले मिश्रा भी हैरान परेशान हो गए। उन्होंने रीडर को बिल बनाने से इंकार किया और मीटर को तुरंत लैब में जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की। यदि बिल बनता तो राशि एक लाख रुपए के करीब बनती। लैब की जांच और रिपोर्ट में कितना समय लगेगा कहना मुश्किल है। बिल बनने के बाद उन्हें राशि जमा करना पड़ती। फिलहाल उनका बिजली मीटर लैब में जांच के लिए गया हुआ है और वे चाहते हैं कि उनके सामने ही जांच हो। वे लैब से फोन का इंतजार कर रहे हैं।
ये महज एक मामला नहीं है। बिजली के इलेक्ट्रॉनिक मीटर की गड़बड़ी से उपभोक्ताओं को तगड़ी चपत के रोजाना मामले सामने आते हैं। कई मामलों में जागरूक और अच्छी पहचान वाले उपभोक्ता तो दौड़भाग करके बिल को सही स्तर पर लाने में सफल हो जाते हैं, लेकिन कई उपभोक्ता बिजली कंपनी के स्थानीय कार्यालयों से लेकर मुख्यालय तक लंबी दौड़ को मजबूर रहते हैं। इसके बावजूद हैरानी ये हैं कि बिजली कंपनी इलेक्ट्रॉनिक मीटर में रीडिंग से होने वाली गड़बड़ी को साफतौर पर मानने को तैयार नहीं होती। उपभोक्ताओं को भी बिजली कंपनी की मीटर जांच लैब की रिपोर्ट पर भरोसा नहीं है। ऐसे में समय के साथ बिजली उपभोक्ता और बिजली कंपनियों के बीच लगातार अविश्वास की खाई लगातार गहरी होती जा रही है।
मीटर जांच की स्वतंत्र यूनिट नहीं, कैसे हो भरोसा
- बिजली कंपनी की मीटर जांच लैब में हर माह 1300 से अधिक मीटर की जांच होती है और 93 प्रतिशत में मीटर सही बताकर उपभोक्ता से बिल जमा करने का कहा जाता है। एक बार लैब की रिपोर्ट में खपत सही दर्ज हुई तो फिर उपभोक्ता को बिल जमा करना ही पड़ता है।
नियम छह माह के औसत से बिल जमा करने का, कंपनी का जोर पहले बिल जमा करें
- मीटर यदि जांच के लिए लैब में गया है तो बिजली एक्ट के नियमानुसार उपभोक्ता अपनी पिछली छह माह की औसत बिजली खपत के आधार पर मौजूदा माह का बिजली बिल जमा कर सकता है। हैरानी ये हैं कि बिजली कंपनी इसका प्रचार ही नहीं करती। उपभोक्ताओं पर बिल जमा करने का दबाव डालते हुए बाद में राशि एडजस्ट करने की बात कही जाती है।
बिजली में 86 फीसदी शिकायतें बिल संबंधी
- बिजली मामले में एक साल के दौरान कंपनी के पास विभिन्न माध्यमों से भोपाल से जुड़ी 1362 शिकायतें आई। इनमें से 86 फीसदी शिकायतें बिजली बिल और रीडिंग से जुड़ी हुई है। ऐसे में इसपर कंपनी को विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
इनका कहना
- किसी दिक्कत की वजह से मीटर रीडिंग बिलिंग में गड़बड़ी है और मीटर जांच के लिए भेजा है तो छह माह की औसत खपत के आधार से बिजली बिल जमा किया जा सकता है। हमनें उपभोक्ता के मीटर को जांच के लिए लैब भेज दिया है।
- अंकुर कास्कर, प्रबंधक दानिशकुंज
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कोट्स
बिजली मीटर में गड़बडिय़ों की शिकायतों पर हमने खुद उपभोक्ताओं के परिसरों में जाकर स्थिति देखी है। हम इस तरह का सिस्टम बनवा रहे हैं जिससे ये गड़बडिय़ां रूके। सही बिल पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
- प्रद्धुम्रसिंह तोमर, ऊर्जा मंत्री
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मुझे बिजली कंपनी की लैब पर भरोसा नहीं है। मैंने बिजली कंपनी को लिखित में कहा है कि जब मेरे मीटर की जांच हो तो मुझे बुलाएं। मैं इंतजार कर रहा हूं।
शैलेष मिश्रा, उपभोक्ता