
भोपाल. ई-टेंडर घोटाले में जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू ने इंदौर के मुकेश शर्मा की तलाश तेज कर दी। मुकेश शर्मा ने हैदराबाद की जीवीपीआर लिमिटेड और जेएमसी लि. कंपनियों के साथ मिलकर ई-टेंडर में जमकर धांधली की है।
मुकेश ने ई-टेंडर दिलाने में ऑस्मो आईटी सॉल्यूशन, इस्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कारपोरेशन, कुछ आईएएस अफसरों और एक भाजपा के पूर्व मंत्री के इशारे पर जीवीपीआर लिमिटेड और जेएमसी लि को कई टेंडर दिलाए हैं।
ईओडब्ल्यू ने मुकेश शर्मा को दो बार नोटिस देकर बयान के लिए बुलाया लेकिन वह नहीं पहुंचा। इसके बाद मुकेश शर्मा और उनके एक अन्य सहयोगी धवन के यहां इंदौर में भी दबिश दी लेकिन नहीं मिले।
ईओडब्ल्यू की दो टीम ने दोनों के यहां दबिश दी, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। शनिवार को दिनभर यह भी चर्चा बनीं रही कि मुकेश को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने इससे इंकार कर दिया। सूत्रों के अनुसार मुकेश शर्मा ने ई-टेंडर घोटाले में अहम भूमिका निभाई है।
भाजपा सरकार के एक पूर्व मंत्री के करीबी होने के कारण मुकेश जांच में भी सहयोग नहीं कर रहे हैं। इधर, ईओडब्ल्यू ने आरोपी जीवीपीआर और जेएमसी कंपनी पर भी शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। डीजी केएन तिवारी ने बताया कि इन कंपनियों को नोटिस जारी कर दिया गया है। जांच की जा रही है। जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अभी तक की जांच में ईओडब्ल्यू को करीब 165 टेंडरों में टेंपरिंग की पुष्ठि हो चुकी है। वहीं इसी तरह के टेंपरिंग में शामिल 250 से अधिक टेंडरों में टेंपरिंग की बात सामने आई। इनमें जीवीपीआर लिमिटेड और जेएमसी लि, मुकेश शर्मा व धवन की मिलीभगत होना पाया गया है।
इधर,गुजरात की माधव इंफ्रा प्रोजेक्ट लि व सोरठिया वेलजी प्रालि को ई-टेंडर घोटाले में आरोपी बनाए जाने के कारण लगातार भोपाल के चक्करों से बचने और प्रकरण में अपना पक्ष रखने के लिहजा से बिट्टन मार्केट के पास मन्नीपुरम कॉलोनी ऑफिस शुरु करने के लिए भवन किराए पर लिया है।
दोनों ही कंपनियों को ई-ओडब्ल्यू ने आरोपी बनाया है। वहीं इनके करीब डेढ़ दर्जन संचालकों को भी नोटिस देकर बयान के लिए बुलाया था, लेकिन सोरठिया वेलजी कंपनी ने कोर्ट से ट्रांजिट बैल ले ली और माधव इंफ्रा के अमित खुराना बयान देने ही नहीं पहुंचे। लेकिन ईओडब्ल्यू की कार्रवाई को देखते हुए दोनों कंपनियों ने संयुक्त ऑफिस शुरु करने का मन बना लिया है।