भोपाल

राजनीतिक नियुक्तियों पर बोले शिवराजसिंह चौहान: यह काम मेरा नहीं, अब मुझ पर बड़ी जिम्मेदारी

Shivraj Singh Chauhan- पत्रिका से खास बातचीत: किसानों की आय बढ़ाने में जुटे केंद्रीय कृषि मंत्री मप्र में राजनीतिक नियुक्तियों पर बोले… 'अपने जिम्मे का काम देख रहा हूं, किसानों की जिम्मेदारी मुझ पर'

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Apr 11, 2026
Exclusive Interview with Union Agriculture Minister Shivraj Singh Chouhan

Shivraj Singh Chauhan - मध्यप्रदेश के किसानों को पहली बार आधुनिक खेती सहित इंटीग्रेटेड फार्मिंग के विभिन्न आयामों से रू-ब-रू करवाने के लिए राष्ट्रीय स्तर का तीन दिवसीय कृषि महोत्सव रायसेन में आयोजित करवाया जा रहा है। शनिवार से होने वाले इस आयोजन से ठीक पहले केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान Shivraj Singh Chauhan ने पत्रिका से खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने तमाम तत्कालीन मुद्दे फिर चाहे खेती-किसानी हो, पांच राज्यों की चुनावी तपिश या फिर निगम-मंडलों का 'महीनों से रुका एक फैसला' हो, इन तमाम विषयों पर खुलकर चर्चा की। पढि़ए बातचीत के प्रमुख अंश-

बीज से बाजार तक वाली थीम पर किसान महोत्सव में क्या खास रहेगा! आयोजन के लिए मप्र का चुनाव क्यों?

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शिवराजसिंह चौहान: खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसान की आय कैसे बढ़े ये इस सम्मेलन का सार है। अभी तक ऐसे कार्यक्रम नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में होते थे। इसमें दिल्ली के आसपास के किसान ही आ पाते थे। यह पहली बार मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में आयोजित हो रहा है। इसमें भाषण नहीं, बल्कि 20 सत्र होंगे। वैज्ञानिक, अधिकारी, विशेषज्ञों के साथ किसान नवाचार सीखेंगे।

कृषि क्षेत्र में क्या तीन नवाचार आपके द्वारा किए जा रहे हैं?

शिवराजसिंह चौहान: रबी-खरीफ फसल का प्लान बनाने अब राज्यवार कॉन्फ्रेंस होंंगी। जयपुर में पहली हुई। लखनऊ में दूसरी होगी। हर राज्य का कृषि रोडमैप बनेगा। लैब में काम करने वाले हमारे पास 16 हजार कृषि वैज्ञानिक हैं। अब किसानों को खेती की बारीकियां बताएंगे।

युद्ध के कारण खाद आपूर्ति पर संकट बताया जा रहा है?

शिवराजसिंह चौहान: अमरीका-ईरान युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में कच्चा माल महंगा होने के बाद भी देश में खाद के दाम नहीं बढ़ेंगे। सरकार किसानों को पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। दिक्कतें तो हो रही हैं, पर दूसरे देशों की तुलना भारत की स्थिति बेहतर है। साथ ही खाद का गैर- कृषि व औद्योगिक क्षेत्रों में दुरुपयोग रोकने व पारदर्शी वितरण के लिए सरकार किसान आइडी बनाएगी।

छोटे किसान आपदा का शिकार होते हैं, तब बात होती है उनकी सेकंड इनकम की। क्या उपाय हो रहे हैं?

शिवराजसिंह चौहान: इंटीग्रेटेड फार्मिंग इसी का स्वरूप है। इसमें कृषि के साथ पशुपालन व खेती के अन्य आयाम जोड़े हैं। कृषि महोत्सव में इसे लेकर महत्वपूर्ण सत्र रखा है।

मध्यप्रदेश में गेहूं का बंपर उत्पादन हुआ है। पिछली बार से दोगुना। क्या केंद्र सरकार खरीदी का कोटा बढ़ाएगी।

शिवराजसिंह चौहान: अनुमान के आधार पर एक सीमा तय की जाती है। बाकी सरकार गेहूं-धान खरीदती है। किसी भी अन्य राज्य की अपेक्षा मध्यप्रदेश में भंडारण की समुचित व्यवस्थाएं हैं। राज्य सरकार और केंद्र की कोशिश ये रहती है कि किसान की उपज के सुरक्षित भंडारण की व्यवस्थाएं हों।

बड़ी भूमिका: अब देश के किसानों की जिम्मेदारी

राजनीतिक नियुक्तियां मध्यप्रदेश में लंबे समय से रुकी हैं। क्या वजह मानते हैं?

शिवराजसिंह चौहान: मध्यप्रदेश का काम अब मेरी तरफ है नहीं और जो काम मेरी तरफ होता है मैं सिर्फ उसी पर ध्यान देता हूं। देश के किसानों की बड़ी जिम्मेदारी है, उसे निभा रहा हूं। मध्यप्रदेश में नेताओं की सक्षम और समर्थ टीम है। मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और अन्य लोग हैं, जो यह देख रहे हैं। वे योग्य और उचित फैसला लेंगे, ये मेरा विश्वास है।

वेयरहाउसेस में पहले से काफी स्टॉक है। नए गेहूं के लिए स्थान नहीं। क्या हल निकलेगा समस्या का?

शिवराजसिंह चौहान: वेयरहाउस बढाने सभी राज्यों को अपनी योजनाओं के तहत निजी निवेश को आकर्षित करना चाहिए। एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की योजना के तहत केंद्र भी प्रयास करती है कि भंडारण की व्यवस्थाएं बेहतर हों। उचित भंडारण से इन समस्याओं का हल निकलेगा।

जैविक उत्पाद कहां बेचें, इस पर किसानों को संशय रहता है। जैविक उत्पाद सही है या नहीं ये भी सवालों में रहता है?

शिवराजसिंह चौहान: इसके लिए सर्टिफिकेशन की व्यवस्था है। कई किसान सर्टिफिकेशन करवा रहे हैं। एक्सपोर्ट करने और भारत के बाजारों में कारोबार करने का सर्टिफिकेशन अलग है। इससे किसानों की समस्या खत्म होगी।

केरल, पश्चिम बंगाल जैसे चुनावी राज्यों में भाजपा की राहें मुश्किल रही हैं। आपने दौरे में क्या महसूस किया?

शिवराजसिंह चौहान: मुझे लगता है पश्चिम बंगाल में अब भाजपा की राह आसान है। वहां के करप्शन, कटमनी, घुसपैठ और अराजकता के कारण लोग बदलाव के लिए छटपटा रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि केंद्रीय योजनाओं का राज्य सरकार लाभ ही नहीं उठा रही। केरल मेें भी किसानों के बुरे हाल हैं। धान खरीदी का पैसा खातों में देने के बजाय वाउचर दिया जाता है। जिसे किसान बैंक लेकर जाता है। उस आधार पर कर्ज दिया जाता है। अब समझ नहीं आता आखिर ये कौन सी व्यवस्था है।

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Published on:
11 Apr 2026 11:21 am
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