
Raja-Ketan murder case: आज समाज के लिए कम होता संयम, आपसी संवाद की कमी और अनियंत्रित गुस्सा ऐसा खतरनाक अलार्म बन चुके हैं, जो हंसते-खेलते परिवारों को पल भर में तबाह कर रहे है। हाल ही में पुणे का चर्चित केतन हत्याकांड हो या पिछले साल राजा रघुवंशी हत्याकांड, या मुरैना में भागवत कथा में भक्ति नृत्य करने के बाद पति द्वारा पत्नी और बच्चों की हत्या, ये महज अपराध नहीं, बल्कि दम तोड़ते धैर्य और दम घोंटती मानसिकताओं का जीवंत उदाहरण है।
समाजशास्त्रियों व मनोचिकित्सकों का मानना है कि यदि वक्त रहते सामाजिक सोच व स्वभाव में बदलाव नहीं आया, तो रिश्तों की दरार और गहरी होती जाएगी। पत्रिका ने इन चर्चित घटनाक्रमों पर समाज के लोगों से चर्चा की। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी घटनाओं को रोकने शादियों से पहले 'प्री-मैरिज काउंसिलिंग' को अनिवार्य बनाने की जरूरत है।
जिस तरह की घटनाएं अभी जो देखने और सुनने को मिल रही हैं वह चिंता का विषय है। रिश्ते में संवाद और संस्कारों की कमी इसका मुख्य कारण है। परिवार में बच्चों को यह समझाना आवश्यक है कि अगर आप किसी रिश्ते से संतुष्ट नहीं हैं तो सम्मान सहित ना कहना बेहतर है। आज कल युवा पीढ़ी वास्तविक जीवन की सच्चाई से अंजान है और सोशल मीडिया और मोबाइल से समाधान खोजते हैं। परिवार के बीच आपसी संवाद और नैतिक संस्कार की कमी ही ऐसे अपराध बढ़ने का कारण है। - वंदना सिंघई, समाजसेवी
पिछले कुछ समय से ज्यादातर ऐसी घटनाएं सुनने को मिल रही हैं कि लड़कियों ने पति या मंगतेर को षड्यंत्र कर बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया। इसके लिए किसी न किसी हद तक माता-पिता भी जिम्मेदारी हैं, कि वे अपने विचार बच्चों पर न थोंपे। अगर अपने बच्चों के बारे में कोई बात पता है तो उसे माता, पिता को छिपाना नहीं चाहिए, बल्कि आपस में चर्चा कर इसका समाधान करना चाहिए। माता पिता बच्चों को अच्छे संस्कार दें। - मुकेश गोयल, प्रांतीय सचिव अग्रवाल महासभा मप्र
आज परिवार में साथ रहते तो हैं, लेकिन खुलकर बात करना कम हो गया है। छोटी-छोटी बातें मन में रह जाती हैं और वही बाद में बड़े विवाद का कारण बनती हैं। यहीं बडी-बड़ी घटनाओं को अंजाम देती है। शादी सिर्फ दो लोगों का साथ नहीं, दो सोच और दो परिवारों का मेल है। अगर शादी से पहले काउंसलिंग हो तो अपेक्षाओं और जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। - नारायण सिंह कुशवाहा, कुशवाहा समाज
समाज में बढ़ती हिंसक घटनाएं केवल प्रेम संबंधों या लिव-इन रिलेशन का परिणाम नहीं हैं, बल्कि सहनशीलता की कमी, मानसिक तनाव, सामाजिक दबाव भी इसके बड़े कारण हैं। परिवार व समाज को युवाओं को समझने, उनकी भावनाओं को स्वीकारने व मार्गदर्शन देने की जरूरत है। - डॉ. प्रो. शशांक शेखर ठाकुर, सोशलॉजिस्ट
आज की भागदौड़ और स्वच्छंद जीवनशैली के कारण रिश्तों में अस्थिरता और भावनात्मक असंतुलन बढ़ रहा है। कई युवा मानसिक दबाव, असुरक्षा को संभाल नहीं पाते। माता-पिता बच्चों के साथ खुला संवाद रखें।- रजनीश जैन, साइकोलॉजिस्ट