
Taxi Drivers Union Strike Bhopal (आंदोलन के नाम पर गुंडागर्दी! Photo Source- Input)
Bhopal News :मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एग्रीगेटर कंपनियों के खिलाफ रात 12 बजे से शुरु हुई हड़ताल ने मंगलवार सुबह से शहर के कई इलाकों में उग्र रूप धारण कर लिया है। शहर के कई प्रमुख इलाकों जैसे- बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और कई प्रमुख चौराहों पर ओला और ऊबर टैक्सियों से यात्रा कर रहे लोगों को जबरदस्ती उतारा जा रहा है। ऐसे में संबंधित एग्रीगेटर कंपनियों के चालकों को भाड़े का नुकसान तो हो ही रहा है, साथ ही आम राहगीर (कई भारी सामान सहित) बीच रास्ते में उतरकर अपने अपने गंतव्य तक पैदल जाने को मजबूर हैं।
बताया जा रहा है कि, टैक्सी चालक संघ भी दो गुटों में बंट गया है। एक गुट हड़ताल नहीं चाहता और दूसरा हड़ताल चाहता है। आरोप है कि, जो ग्रुप हड़ताल चाहता है, वही आम लोगों को पीली नंबर प्लेट वाले वाहनों से जबरन उतार रहे हैं।
शहर के नादरा बस स्टैंड, रानी कमलापति रेलवे स्टेशन और दानिश चौराहे पर ये प्रदर्शनकारी पीली नंबर प्लेट वाले वाहनों से यात्रा करने वाली सवारियों को जबरदस्ती उतार रहे हैं। बीच सड़क पर खड़े प्रदर्शनकारी किसी भी मजबूरी के बताए जाने के बावजूद सवारी को यात्रा नहीं करने दे रहे। ऐसे में आम लोगों में खासा भय का माहौल देखने को मिल रहा है। लाल बत्ती चौराहों पर ये प्रदर्शनकारी खड़े हैं और ओला-उबर वाहनों को रोककर यात्रियों को जबरन उतार रहे हैं। बागसेवनिया थाना और दानिश कुंज चौराहे पर भी यही स्थिति देखने को मिल रही है।
टैक्सी चालक संघ की हड़ताल के चलते एक तरफ जहां मंगलवार रात 12 बजे से ओला, उबर समेत अन्य कैब का संचालन बंद किया गया है तो वहीं, मंगलवार सुबह भोपाल रेलवे स्टेशन पर इसका सीधा असर दिखाई दिया। यात्रियों ने ऑनलाइन कैब बुक करने की कई बार कोशिश की, लेकिन गाड़ियां उपलब्ध नहीं हो सकीं। मजबूरन उन्हें ऑटो या दूसरे साधनों का सहारा लेना पड़ा। जिसका फायदा ऑटो चालकों द्वारा आपदा में अवसर के रूप में उठाया जा रहा है। यात्रियों की मानें तो ऑटो चालक उनसे सामान्य दिनों के मुकाबले डेढ़ से दो गुना किराया वसूल रहे हैं।
वहीं, बंद के असर के चलते खासतौर पर स्टेशन और बस स्टैंड आने जाने वाले यात्रियों को खासा परेशान होना पड़ रहा है। ड्यूटी पर जाने वाले और ट्रेन से यात्रा करने वाले अधिक परेशान हो रहे हैं। स्टेशन पर सामान लिए यात्री भी सामान के साथ काफी देर टैक्सी का इंतजार करते नजर आ रहे हैं।
टैक्सी चालक संघ की मांग है कि, सरकार टैक्सी का उचित और स्थायी किराया निर्धारित करे। संगठन का कहना है कि, एग्रीगेटर कंपनियां अपनी सुविधा के अनुसार किराया तय कर रही हैं, जबकि ईंधन, वाहन की किस्त, बीमा, मेंटेनेंस और दूसरे खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। संघ पहले ही 22 से 30 रुपए प्रति किलोमीटर, इसके अलावा 1 से 2 रुपए प्रति मिनट टाइम चार्ज और बेस फेयर लागू करने की मांग कर चुका है। संगठन की डिमांड है कि, सरकार किराया तय करने के बाद एग्रीगेटर कंपनियों को उसी दर पर टैक्सी चलाने के निर्देश दे।
संयुक्त मोर्चे ने एग्रीगेटर कंपनियों के जरिए चलाए जा रहे नॉन-कमर्शियल वाहनों पर भी रोक लगाने की मांग की गई है। इसमें प्राइवेट नंबर की कार, बाइक और ई-रिक्शा शामिल हैं। संगठन का आरोप है कि इन वाहनों के व्यावसायिक इस्तेमाल से कमर्शियल टैक्सी चलाने वाले ड्राइवरों की आय प्रभावित हो रही है।
Updated on:
18 Aug 2026 01:36 pm
Published on:
18 Aug 2026 01:36 pm
