18 अगस्त 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

बाघों को बचाने के लिए मध्यप्रदेश लाएगा देश का पहला ‘टाइगर एक्शन प्लान’

Tiger Action Plan: मध्यप्रदेश की तरफ से बाघों को बचाने के लिए ऐतिहासिक पहल की गई है। क्या है यह पहल? आइए नज़र डालते हैं।
2 min read
Google source verification

भोपाल

image

Tanay Mishra

image

Haricharan Yadav

Aug 19, 2026

Tigers

टाइगर्स (File Photo)

टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) ने बाघ संरक्षण के क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल की है। प्रदेश सरकार अब देश में पहली बार बाघों (Tigers) के प्रबंधन और संरक्षण के लिए ‘टाइगर एक्शन प्लान’ (Tiger Action Plan) तैयार करने जा रही है। सीएम मोहन यादव की अध्यक्षता में हाल ही में हुई राज्य वन्यप्राणी बोर्ड की बैठक में इस विषय पर शुरुआती चर्चा हो चुकी है। यह विशेष प्लान अगले दो-तीन महीने में तैयार हो सकता है। आगामी 10 से 20 वर्षों की अवधि के लिए यह प्रभावी रहेगा। इसे बनाने में देश-विदेश के जाने-माने वन्यजीव विशेषज्ञों और प्रमुख संस्थानों का मार्गदर्शन लिया जाएगा।

बाघों का प्रबंधन पहुंचा नए मोड़ पर

दरअसल मध्यप्रदेश में बाघों का प्रबंधन अब एक नए मोड़ पर पहुंच चुका है। वर्ष 2022 की राष्ट्रीय गणना के अनुसार राज्य में 785 बाघ थे, लेकिन वर्तमान में 9 टाइगर रिज़र्व और सामान्य वन मंडलों के बाघों को मिलाकर इनकी संख्या 1,000 को पार कर चुकी है। तेज़ी से बढ़ते बाघों के कारण राज्य के सामने चुनौतियाँ भी उभरकर सामने आई हैं और इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए टाइगर एक्शन प्लान पर काम किया जा रहा है।

इन कारणों से पड़ी जरूरत

संख्या नियंत्रण और क्षमता प्रबंधन - भविष्य में बाघों की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करना और उनके संतुलन को बनाए रखना ज़रूरी हो गया है।

सुरक्षित रहवास और शाकाहारी जीवों की कमी - जिस तेजी से बाघ बढ़ रहे हैं, उस अनुपात में संरक्षित वन क्षेत्र सीमित हैं। विकास परियोजनाओं और सडक़ों के निर्माण से दखल बढ़ा है। बाघों के लिए शाकाहारी वन्यजीवों (शिकार) की कमी हो रही है।

मानव-बाघ और आपस में संघर्ष - जंगलों में इंसानी गतिविधियों के प्रवेश से बाघों के बीच वर्चस्व को लेकर आपसी संघर्ष बढ़ गया है।

इंसानों और मवेशियों की सुरक्षा - जंगलों से निकल रहे बाघों की चपेट में आने से ग्रामीणों और मवेशियों की जान को खतरा बढ़ गया है।

स्टेट वाइल्डलाइफ प्लान से अलग होगा

देश में अब तक राष्ट्रीय स्तर पर तीन वाइल्डलाइफ एक्शन प्लान लागू हो चुके हैं। तीसरा प्रचलन में है। इसी तरह कर्नाटक, महाराष्ट्र के बाद मध्यप्रदेश ऐसा तीसरा राज्य है जिसका अपना ‘स्टेट वाइल्डलाइफ प्लान' है, जो 2047 तक प्रभावी है। इस प्लान में सभी प्रकार के वन्यजीवों का प्रबंधन शामिल है, जबकि टाइगर एक्शन प्लान, स्टेट वाइल्डलाइफ प्लान से अलग और एक्सक्लूसिव तौर पर सिर्फ बाघों पर केंद्रित होगा।

विशेषज्ञों का लिया जाएगा सहयोग

मध्यप्रदेश के वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन ने बताया कि सीएम के निर्देश पर इस दिशा में योजनाबद्ध काम शुरू कर दिया है। एक विशेषज्ञ समिति बनाई जाएगी, जिसके कई हिस्से हो सकते हैं। अच्छा एक्शन प्लान बनाने के लिए देश-दुनिया के विशेषज्ञों के अलावा बड़े संस्थानों की मदद ली जाएगी। चरणबद्ध तरीके से काम को जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।