कैसे मनाएं बाल दिवस, राजधानी भोपाल में मासूमों का ये हाल जानकर हैरान रह जाएंगे आप
भोपाल। पढ़ाई-लिखाई कराने के नाम पर लाए गए चार बच्चों से एेशबाग के एक बंद कमरे में 14 से 15 घंटों तक काम कराया जा रहा था। बच्चों को बंधक बनाकर काम कराने की जानकारी चाइल्ड लाइन को मिली। बच्चों से बंधुआ मजदूरी कराए जाने की पुष्टि होने के बाद चाइल्ड लाइन ने श्रम विभाग और एेशबाग पुलिस की मदद से चार बच्चों को मुक्त कराया। आपको बता दें कि हम इसी माह की 14 तारीख को बाल दिवस मनाने जा रहे हैं, बच्चों का आज भी ये हाल बाल दिवस पर ही कलंक है।
पुलिस, श्रम विभाग और चाइल्ड लाइन की टीम ने एेशबाग के बागउमराव दूल्हा में एक कम रोशनी वाले बंद कमरे में बंधक बनाकर रखे चार बच्चों को मुक्त कराया। बच्चों से कांच की चूडि़यों पर नग लगवाए जा रहे थे। बच्चांें ने बताया कि उन्हें इस छोटी फैक्ट्रीनुमा कमरे का मालिक अनवर बिहार से लाया था। अनवर मूलत: बिहार का रहने वाला है और उसके पिता अभी भी बिहार में रहते हैं। उसने दूर के रिश्तेदारों और गांव के लोगों के बीच भोपाल में ले जाकर बच्चों को पढ़ाई के साथ छोटा-मोटा काम कराने की बात कही। माता-पिता ने बच्चों के रहने खाने के साथ पढ़ाई की व्यवस्था हो जाने की बात सोचकर बच्चों को भेज दिया। भोपाल आने पर अनवर बच्चों को सुबह सात-आठ बजे एक कमरे में बंद करता और चूडि़यों पर नग लगाने का काम पर लगा देता। बच्चों से सुबह सात-आठ बजे से रात 10-11 बजे तक काम कराता। बच्चों को न तो छुट्टी दी जाती न ही काम के बदले रुपए ही दिए जाते। उन्हें सिर्फ खाने-
पीने और चंद घंटे सोने की मोहलत देकर बंद कम रोशनी
वाले कमरे में अमानवीय परिस्थितियों में लगातार काम कराया जा रहा था। पड़ताल में पता चला कि अनवर बच्चों की कमाई के नाम पर प्रतिमाह 1500 से 2000 रुपए उनके माता-पिता को पहुंचवा देता था। श्रम विभाग की शिकायत पर पुलिस ने अनवर के खिलाफ बाल श्रम अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है।