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UCC बिल का ड्राफ्ट तैयार, लिव इन में रहने वालों की बढ़ी मुसीबत, बिना पंजीयन ‘रिलेशनशिप’ तो होगी जेल

UCC Bill Draft Ready: 50 से ज्यादा विशेषज्ञों ने किया अध्ययन। आईं कई सिफारिशें, सरकार सिफारिशें मानने से कर सकती है इनकार, जोड़ लकती है नए विषय भी
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UCC BILL Draft MP

UCC BILL Draft MP: उच्च समिति ने सीएम मोहन यादव को सौंपा ड्राफ्ट। (photo:patrika)

UCC Bill Draft Ready: मध्यप्रदेश में अब लिव-इन रिलेशनशिप में रहना आसान नहीं होगा। लिव-इन में रहने वालों को रजिस्ट्रार के सामने पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। रजिस्टार अपनी ओर से एक कापी संबंधित थाने को भेजेंगे। सरकार लिव इन में रहने वालों के अभिभावकों को भी यह जानकारी देगी। बिना पंजीयन लिव-इन में रहना अपराध की श्रेणी में आएगा। इसके लिए जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है। ये सिफारिशें प्रदेश में लागू की जाने वाली समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के तैयार फाइनल ड्राफ्ट में किए गए हैं।

उच्च स्तरीय समिति ने सीएम को सौंपा UCC ड्राफ्ट

सीएम डॉ. मोहन यादव को उच्च स्तरीय समिति ने सोमवार शाम यह ड्राफ्ट सौंपा है। समिति ने कई और अहम सिफारिशें की हैं। इसमें सभी धर्मों के लोगों के लिए विवाह पंजीयन अनिवार्य, मौखिक और प्रथागत तलाक को कानूनी दंड के दायरे में लाना, कोर्ट से होने वाले तलाक ही मान्य करना भी है। तीन खंडों वाले इस ड्राफ्ट को कानूनी पहलुओं पर परखने सरकार ने विधि विभाग को भेजा है। सरकार विधानसभा के इसी मानसून सत्र में यूसीसी बिल लाने जा रही है। सीएम पहले ही इसकी घोषणा कर चुके हैं। हालांकि अभी ड्राफ्ट के विषयों में सिफारिशें हैं। कानूनी जानकार बताते हैं, सरकार चाहे तो कई सिफारिशें मानने से इनकार कर सकती है, कुछ नए विषय जोड़ भी सकती है।

आदिवासी और विशेष पिछड़ी जातियां बाहर

UCC से आदिवासी समेत कई संकटग्रस्त और विशेष पिछड़ी जातियों को बाहर रखने की सिफारिश की गई है। उन्हें बाहर रखने की बात पहले ही सीएम कह चुके हैं।

  1. विवाह पंजीयन: सभी धर्मों के लोगों को विवाह पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। अवधि 30 से 60 दिन हो सकती है। अभी भी विवाह प्रमाण पत्र बनता है, लेकिन कई नहीं बनवाते।
  2. कोर्ट से ही तलाक मान्य: धर्म कोई भी हो, कोर्ट से ही हुई तलाक प्रक्रिया मान्य होगी। अभी कुछ धर्मों में मौखिक-प्रथागत तलाक की प्रथा है। यह दंडनीय है।
  3. लिव-इन का पंजीयन जरूरी: लिव-इन में रहने वालों को अपना रिश्ता रजिस्ट्रार के सामने रजिस्टर करना होगा। न करने पर दंड का प्रावधान।
  4. बहु विवाह पर रोक: हर धर्म में पति या पत्नी के जीवित रहते या कानूनन तलाक न होने तक दूसरी शादी में पूरी तरह रोक रहेगी। बहुविवाह अपराध होगा।
  5. संपत्ति अधिकार: बेटे-बेटियों को संपत्ति के उत्तराधिकार में समान कानूनी अधिकार मिलेंगे। यह पहले से है। अब दायरे में सभी धर्मों के लोग आएंगे।

ऐसा है ड्राफ्ट

ड्राफ्ट तीन खंडों का ड्राफ्ट है। पहले खंड के 10 अध्याय में समिति की अनुशंसाओं का प्रतिवेदन है। अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय-राज्य की विधियों-प्रथाओं का विश्लेषण व अनुशंसा है। दूसरा खंड विधेयक प्रारूप में। विधेयक के 4 भाग, 404 धाराएं व 7 अनुसूची है। तीसरे खंड में जनपरामर्श प्रतिवेदन, इसमें जिला, राज्य स्तर पर, वेबसाइट से मिले 9.58 लाख+ परामर्श का विवरण व विश्लेषण।