14 जुलाई 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

एमपी में अफसरों का संकट! रिटायर हो जाएंगे 221 बड़े ऑफिसर तब कौन संभालेगा सिस्टम?

MP Officer Shortage: मध्य प्रदेश के सामने बड़ी चुनौती, नए जिले, नई योजनाएं, लेकिन 2030 तक एमपी में खाली हो जाएंगे IAS, IPS, IFS अफसरों के सैंकड़ों पद, पहले से ही कोटे से कम संख्या, 5 साल बाद बढ़ेंगी और दिक्कतें
2 min read
Google source verification

भोपाल

image

Sanjana Kumar

image

हरिचरण यादव

Jul 14, 2026

MP Officers Shortage

MP Officers Shortage: मध्य प्रदेश में पहले से ही कोटे से कम हैं अफसर, 5 बाद सामने खड़ी होगी बड़ी चुनौती। (photo:patrika creative)

MP IAS IPS IFS officers Shortage: मध्यप्रदेश में निचले स्तर पर ही शासकीय सेवकों का ही टोटा नहीं है, बल्कि बड़े पदों पर भी अफसरों की कमी गहराती जा रही है। इसका प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष असर आम आदमी पर पड़ रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि एक ओर तेजी से प्रदेश की आबादी बढ़ी है, जिसकी अपनी कई जरुरतें है। जिनमें बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं शामिल है। सरकार ने भी बीते सालों में इन सुविधा की जनता तक कम से कम समय में डिलीवरी के लिए कई सार्वजनिक उपक्रमों की स्थापना की है।

उधर जिलों की संख्या बढ़ाई जा रही है, जिन्हें नया सेटअप चाहिए। केंद्र ने भी कई अतिरिक्त सेवाएं और बड़ी परियोजनाएं शुरू कर दी हैं। इन सबके प्रबंधन, नियंत्रण के लिए एमपी को अतिरिक्त आइएएस, आइपीएस और आइएफएस की जरूरत है, जो पूरी होने की बजाए इनकी कमी साल दर साल बढ़ती ही जा रही है। अब हाल यह है कि अगले पांच साल में 221 आइएएस, आइपीएस और आइएफएस सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इनमें सर्वाधिक 95 आइपीएस, 86 आइएएस और 40 आइएफएस शामिल हैं।

मध्यप्रदेश कैडर में 459 अफसरों की जरूरत

असल में अकेले आइएएस कोटे की बात की जाए तो मध्यप्रदेश कैडर में 459 अफसर होने चाहिए, जबकि कार्यरत 393 ही है। इनमें से भी 29 केंद्र में विभिन्न पदों पर सेवाएं दे रहे हैं। इस तरह मप्र में कुल 364 ही काम कर रहे हैं। इनमें से भी कई अफसर प्रशिक्षण के लिए जाते रहते हैं। कमोवेश कुछ ऐसा ही हाल आइपीएस और आइएफएस हैं। सेवानिवृत्त आइएफएस एके बरोनिया का कहना है कि अखिल भारतीय सेवाओं में एमपी के लिए तय कोटे की समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए। मध्य प्रदेश हो या कोई अन्य राज्य, आबादी और उसकी जरूरत देखना चाहिए।

केंद्र बढ़ाता है कोटा

आइएएस, आइपीएस और आइएफएस का चयन अखिल भारतीय सेवाओं के तहत होता है, जो कि केंद्र करता है। यह जिम्मा केंद्रीय कार्मिक विभाग का है। जानकारों की माने तो लंबे समय में मध्य प्रदेश में आइएएस का कोटा नहीं बढ़ाया। यह स्थिति तब है जब राज्यों में अफसरों का टोटा है।

आइपीएस-आइएफएस की संख्या बढऩा इसलिए जरूरी

आइएएस:मध्यप्रदेश ने नक्सल का खात्मा तो कर दिया, लेकिन कई चुनौतियां अब भी है। जिसमें सायबर अपराध, ड्रग्स का अवैध कारोबार आदि मुख्य है। जिलों की संख्या बढ़ी है, भविष्य में यह और बढ़ सकती है जिनमें आइपीएस की तैनाती की जरुरत होगी।

आइएफएस: पहले की तुलना में वन क्षेत्रों के लिए चुनौतियां बढ़ी है। वन्यजीवों का अंतरराज्यीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तस्करी के मामले आ रहे हैं। वन क्षेत्रों को अवैध कब्जे और अतिक्रमण से मुक्त कराना भी प्रदेश के सामने बड़ी चुनौती है।

आइएएस से जुड़े फैक्ट

459 आइएएस का कोटा मध्यप्रदेश के लिए- 66 आइएएस कोटे में है कम, जबकि वर्षों से नहीं बढ़ा कोटा

393 आइएएस मध्यप्रदेश कैडर में अभी कार्यरत हैं - 29 आइएएस इनमें से दिल्ली में तैनात

364 आइएएस ही एमपी में दे रहे सेवाएं - 100 से ज्यादा आइएएस की मध्यप्रदेश को अतिरिक्त जरूरत

5 साल में कम होंगे इतने अफसर

वर्ष - आइएएस - आइपीएस - आइएफएस

2026 - 10- 13 - 06

2027 - 24 - 13 - 12

2028 - 15 - 25 - 10

2029 - 20 - 19 - 06

2030 - 17 - 25- 06

कुल - 86 - 95 - 40