Pole vaulter viral photo- मप्र अकादमी के यह दो खिलाड़ी झारखंड के रांची गए थे, उन्होंने देश को गोल्ड-सिल्वर दिलाया, लेकिन लौटते समय जो हुआ, उसका गुस्सा सोशल मीडिया पर दिखने लगा है...।
Indian athletes struggle-देश को गोल्ड-सिल्वर देने वाले इन खिलाड़ियों की जो तस्वीरें आई हैं, वो एक खबर नहीं उस सिस्टम का आईना हैं जहां खिलाड़ी रिकॉर्ड तो बनाते हैं, लेकिन सम्मान और सुविधाएं उनसे काफी दूर हैं। जिन कंधों पर देश का तिरंगा लहराने की जिम्मेदारी है, वही खिलाड़ी अपने 5 मीटर लंबे पोल ई-रिक्शा में ढोते नजर आए। झारखंड के रांची में इतिहास रचने के कुछ घंटों बाद ही उनकी बेबसी पूरी 'खेल व्यवस्था' पर बड़ा सवाल बन गई।
झारखंड की राजधानी रांची के बिरसा मुंडा स्टेडियम में फेडरेशन कप में शामिल होने के लिए मप्र अकादमी भोपाल के दो खिलाड़ियों ने भारतीय एथलेटिक्स में इतिहास रच दिया। देव कुमार मीणा और कुलदीप कुमार ने पुरुष पोल वॉल्ट में 5.45 मीटर कीछलांग लगाकर नया रिकॉर्ड बना दिया और इसी साल होने वाले कॉमन वेल्थ गेम्स के लिए क्वालिफाई कर लिया।
इन खिलाड़ियों ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है और मध्यप्रदेश का नाम ऊंचा किया है, लेकिन खेल खत्म होने के बाद कुछ ही घंटों में इनकी दुर्दशा देखने को मिली। यह खिलाड़ी अपने-अपने 5 मीटर लंबे फाइबरग्लास पोल को ई-रिक्शा में रखकर होटल ले जाते नजर आए। पोल वॉल्ट में इस्तेमाल होने वाले यह पोल इतने लंबे और संवेदनशील होते हैं कि इन्हें संभावना और एक जगह से दूसरी जगह तक ले जाना बहुत मुश्किल होता है। यह दोनों ही नेशनल खिलाड़ी खुद ही अपने साथ ले गए उपकरणों की ढुलाई करते नजर आए। खेल विभाग की व्यवस्था पर यह तस्वीरें एक सवाल हैं।
इस बारे में एएफआई फाइनेंस कमेटी के चेयरमैन मधुकांत पाठक ने मीडिया को इस बारे में सफाई दी। वे अच्छी नौकरी में है, अच्छी कंपनियों के साथ टाइअप में हैं। यह पोल उनको ले जाने थे तो कैसे भी ले जा सकते थे, इसके लिए हमारी जिम्मेदारी नहीं है।
मुंबई में भी दोनों खिलाड़ियों को अपमानित होना पड़ा था, जब पनवेल रेलवे स्टेशन पर टिकट चैकर ने दोनों ही नेशनल खिलाड़ियों को ट्रेन से यह कहकर उतार दिया था कि इतने लंबे पोल को बोगी में नहीं ले जाया जा सकता है। उस समय यह खिलाड़ी ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चैम्पियनशिप से लौट रहे थे।
इधर, नेशनल खिलाड़ियों के अपमान के मामले ने सोशल मीडिया पर जोर पकड़ लिया है। वायरल तस्वीरों पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए लोग लिख रहे हैं कि जिस तरह क्रिकेट को बढ़ावा भारत में दिया जाता है, उसी तरह अन्य खेलों जैसे ओलंपिक स्तर केखिलाड़ियों को बेसिक सुविधाओं के लिए भी तरसना पड़ता है। रांजी की इस घटना के बाद खेल प्रेमी इसे वर्तमान व्यवस्था पर प्रहार बता रहे हैं। एक यूजर लिखते हैं कि शर्मनाक है, जहां हमारे मंत्री 35 कारों के कारकेड में यात्रा करते हैं, हम खिलाड़ियों को बेसिक चीजें भी नहीं दे पा रहे हैं। वो भी उन खिलाड़ियों को जो देश का नाम रोशन कर रहे हैं।