Uma Bharti-
Uma Bharti- प्रयागराज के माघ मेला में प्रशासन से हुए टकराव के बीच ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बड़ा कदम उठाया। बुधवार को उन्होंने प्रयागराज छोड़ दिया। यहां से काशी के लिए रवाना होने से पहले शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कल मुझे प्रशासन ने सम्मानपूर्वक पालकी में संगम ले जाने, फूल बरसाकर स्नान कराने का प्रस्ताव दिया था लेकिन मैंने ठुकरा दिया। मन इतना व्यथित है कि अब पवित्र जल में भी शांति नहीं मिलेगी। इस बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मामले में एमपी की पूर्व सीएम उमा भारती ने लगातार दो ट्वीट कर राजनीति गरमा दी। पहले ट्वीट में वे प्रशासन द्वारा शंकराचार्य से सबूत मांगने की बात पर भड़कीं थी। कुछ घंटों बाद दूसरा ट्वीट करते हुए उमा भारती ने योगी विरोधियों को लताड़ा। उन्होंने सफाई दी कि वे सीएम योगी के विरुद्ध नहीं हैं।
बीजेपी की फायरब्रांड नेता उमा भारती ने मंगलवार को ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में बड़ा बयान दिया था। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से शंकराचार्य होने के सबूत मांगने को मर्यादाहीन आचरण बताया था।
उमा भारती ने इस मुद्दे पर न केवल शंकराचार्य होने के सबूत मांगने का विरोध किया बल्कि यह भी बताया था कि
इसका अधिकार किसे है। साध्वी उमा भारती ने अपने एक्स हेंडल पर लिखा था कि शंकराचार्य होने के सबूत मांगने का अधिकार सिर्फ शंकराचार्यों और विद्वत परिषद को ही है।
प्रयागराज विवाद पर उमा भारती के इस ट्वीट से खलबली मच गई। बीजेपी की अंदरूनी राजनीति भी गरमा गई। उमा भारती द्वारा माघ मेले के प्रशासनिक अधिकारियों को बुरी तरह लताड़ने को सीएम योगी के विरोध के रूप में देखा जाने लगा। ऐसे में वे दोबारा सक्रिय हुईं और कुछ ही घंटों में नया ट्वीट कर स्पष्टीकरण दिया।
पूर्व सीएम उमा भारती ने नए ट्वीट में साफ किया कि उनका कथन यूपी के सीएम योगी के विरुद्ध नहीं है। मैंने केवल यह कहा है कि किसी के शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन है। उमा भारती ने यह भी कहा कि योगी विरोधी खुशफहमी न पालें, मैं उनके प्रति सम्मान, स्नेह एवं शुभकामना का भाव रखती हूं।