विज्ञान भवन में मप्र कारीगर विज्ञान कांग्रेस का आयोजन
भोपाल। उद्योग, निर्माण, व्यंजन, मेडिसिन सहित अनेक वस्तुओं को बनाने के लिए बांस का उपयोग हो रहा है। बांस पर्यावरण अनुकूल है। इसका उपयोग इको टूरिज्म को बढ़ावा देने में किया जा रहा है। प्रलयंकारी भूंकप के दौरान सुनामी तरंगों को रोकने में बांस का उपयोग हो रहा है। बांस का पहले से ही लगभग डेढ़ हजार कामों के लिए उपयोग हो रहा है।
विज्ञान और तकनीक की बदौलत नए उपयोगों के जुडऩे से यह सूची लगातार लंबी होती जा रही है। यह जानकारी साउथ एशिया बैम्बू फाउंडेशन, गुवाहाटी के निदेशक कामेश सालम ने मप्र कारीगर विज्ञान कांग्रेस में 7 मार्च को बांस शिल्प पर आयोजित तकनीकी सत्र में 'बांस के विविध उपयोगों ' विषय पर व्याख्यान के दौरान दी।
उन्होंने बताया कि बांस एक बेजोड़ वनस्पति है। यह ग्रैमिनी परिवार का सदस्य है। विज्ञान की भाषा में इसे बैम्बू कहते हैं। उन्होंने बताया कि बांस का हर हिस्सा उपयोगी है। यह बेहद मजबूत है। इसके फाइबर से कपड़े और कागज बनाया जा रहा है।
आभूषण और राखियां बनाने के लिए उपयोग हो रहा है। उन्होंने बताया कि बांस से अचार तो पहले ही बना लिया गया है। हाल के वर्षों में कैंडी, नूडल्स और पापड़ भी बनाने की शुरुआत हो चुकी है। ट्राइबल कल्चर में बांस की उपयोगिता को सैकड़ों साल पहले ही समझ लिया गया था। वैज्ञानिक रूप से इसके सेवन करने की भी सैकड़ों फायदे हैं।
विश्व में बांस का विशाल बाजार
कामेश सालम ने बताया कि पूरे विश्व में बांस का बहुत बड़ा बाजार है। उन्होंने बताया कि 18 सितंबर को विश्व बांस दिवस मनाने की शुरुआत कराने में उनकी अहम भूमिका रही है। विचार मंथन सत्र में माटी, बांस, चर्म और धातु विधा के विषय विशेषज्ञों ने कारीगरों के उन्नयन के लिए भावी संभावनाओं पर विचार रखे। समन्वय डॉ.प्रवीण दिघर्रा, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक ने किया। इस अवसर पर कार्यकारी संचालक डॉ.आर.के.सिंह,मुख्य वैज्ञानिक डॉ. राजेश शर्मा और मुख्य वैज्ञानिक भी उपस्थित थे।