Ganesh Chaturthi 2023 Aarti Lyrics in Hindi: गजानन का आशीर्वाद पाना चाहते हैं तो आप गणेश चतुर्थी के पावन मौके पर उनकी आरती जरूर करें.
Ganesh Chaturthi Aarti: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इस बार गणेश चकुर्थी का पर्व 19 सितंबर को है। इस दिन कई लोगों के घरों में गणेशजी विराजमान किए जाएंगे। गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है।
ऐसी मान्यता है कि गणेशजी अपने भक्तों पर जब प्रसन्न होते हैं तो उनके सभी कष्ट हर लेते हैं। साथ ही इस बार गणेश चतुर्थी के दिन बहुत ही शुभ योग बन रहा है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि आप गणेश भगवान (Ganesha Aarti Lyrics) की कौन-सी आरती गणेश चतुर्थी पर उन्हें प्रसन्न करने के लिए पढ़ सकते हैं. पढ़ते हैं आगे…
गणेश जी की आरती (Ganesha Aarti )
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत,
चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे,
मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े,
और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे,
संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत,
कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत,
निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा॥
‘सूर’ श्याम शरण आए,
सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो,
शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो,
जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा॥
गणेश जी की आरती इन हिंदी (Ganesha Aarti Lyrics in Hindi)
जय देव, जय देव,
जय मंगलमूर्ती, हो श्री मंगलमूर्ति
दर्शनमात्रे मन कामनापुर्ति
जय देव, जय देव
रत्नखचित फरा तूज गौरीकुमरा
चंदनाची उटी कुंकुम केशरा।
हिरेजड़ित मुकुट शोभतो बरा।
रुणझुणती नूपुरे चरणी घागरीया॥
जय देव, जय देव
जय देव, जय देव
जय मंगलमूर्ती, हो श्री मंगलमूर्ति
दर्शनमात्रे मन कामनापुर्ति
जय देव, जय देव
लंबोदर पीतांबर फणीवर बंधना।
सरळ सोंड वक्रतुण्ड त्रिनयना।
दास रामाचा वाट पाहे सदना।
संकटी पावावें, निर्वाणी रक्षाव।।
जय देव, जय देव
जय देव, जय देव
जय मंगलमूर्ती, हो श्री मंगलमूर्ति
दर्शनमात्रे मन कामनापुर्ति
जय देव, जय देव
घालीन लोटांगण, वंदिन चरण।
डोळ्यांनी पाहिन रूप तुझे।
प्रेमे आलिंगीन आनंदे पुजिन
भावें ओवालिन म्हाणे नामा।।
त्वमेव माता च पिता त्वमेव,
त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव॥
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव,
त्वमेव सर्व मम देवदेव॥
कायेन वाचा मनसेंद्रियैर्वा
बुद्धात्माना वा प्रकृतिस्वभावात
करोमि यद्यत सरलं परस्मै
नारायणायेति समर्पयामि।।
अच्युतं केशवं रामनारायणं,
कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरि।
श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं,
जानकीनायकं रामचंद्रं भजे॥
हरे राम हरे राम
राम राम हरे हरे।
हरे कृष्णा हरे कृष्ण,
कृष्ण कृष्ण हरे हरे।।
हरे राम हरे राम
राम राम हरे हरे
हरे कृष्ण हरे कृष्ण
कृष्ण कृष्ण हरे हरे।।
सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची।
नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची।।
जय देव, जय देव
जय मंगलमूर्ती, हो श्री मंगलमूर्ति
दर्शनमात्रे मन कामनापुर्ति
जय देव, जय देव।।