
George Kurian- केंद्रीय मंत्रिमंडल में एमपी का प्रतिनिधित्व कम हो गया है। केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन George Kurian द्वारा मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देने से यह स्थिति बनी है। वे मध्यप्रदेश से राज्यसभा सांसद थे। जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा का कार्यकाल 21 जून को खत्म हो गया जिसके बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जार्ज कुरियन का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। मंगलवार को राष्ट्रपति भवन ने बाकायदा प्रेस रिलीज कर उनके इस्तीफे की जानकारी दी। आधिकारिक रूप से बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी की सलाह पर जार्ज कुरियन का मंत्री पद से इस्तीफा मंजूर किया गया है। उनके इस्तीफे से केंद्र सरकार में मध्यप्रदेश का दखल कुछ कम हुआ है। खास बात यह है कि जार्ज कुरियन, पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के बेहद विश्वस्त नेताओं में शुमार थे। केरल में बीजेपी के उत्थान में उनका अहम योगदान है।
65 वर्षीय जॉर्ज कुरियन एमपी से राज्यसभा के सांसद थे। उनका 6 साल का कार्यकाल 21 जून 2026 तक रहा। बीजेपी ने उन्हें दोबारा मौका नहीं दिया था। ऐसे में कार्यकाल समाप्ति के बाद जॉर्ज कुरियन के राजनैतिक भविष्य पर अटकलें लगाई जा रहीं थीं।
राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद मध्यप्रदेश से सांसद जॉर्ज कुरियन ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से भी त्यागपत्र दे दिया है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा भेजा था। मंगलवार को राष्ट्रपति भवन ने आधिकारिक रूप से कहा कि जार्ज कुरियन का केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में 2024 को पद की शपथ ली थी।
जॉर्ज कुरियन मूलत: केरलम के हैं। वे राज्य में बीजेपी संगठन के प्रमुख कर्ताधर्ताओं में से एक हैं। जॉर्ज कुरियन को भले ही पार्टी ने दोबारा राज्यसभा सांसद नहीं बनाया पर वे पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के बेहद भरोसेमंद माने जाते हैं। पीएम और गृह मंत्री के केरलम के दौरों का दारोमदार उन्हीं पर रहता था। यहां तक कि पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के संबोधनों का जॉर्ज कुरियन ही मलयालम में अनुवाद करते थे।
जॉर्ज कुरियन ईसाई थे। यही वजह है कि उन्हें केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों का राज्य मंत्री बनाया गया था। जॉर्ज कुरियन के पास मत्स्य पालन, पशुपालन व डेयरी विभाग भी थे।