
New City In Madhya Pradesh : भोपाल में बाहरी इलाकों और किनारों को विकसित करने प्रस्तावित 51 किमी लंबाई के ग्रोथ कॉरिडोर के लिए 3000 हेक्टेयर जमीन लगेगी। इतना ही नहीं, इस पर 20 हजार करोड़ रुपए का बड़ा बजट खर्च होगा। प्रोजेक्ट के शुरुआती आंकलन में ये तथ्य सामने आए। भोपाल विकास प्राधिकरण को इसकी योजना तय करना है, लेकिन इतना बजट कहां से आएगा, ये तय नहीं है। इस मेगा प्रोजेक्ट में सरकार नई पॉलिसी पर काम करेगी।
ग्रोथ कॉरिडोर के लिए आंकलित जमीन इतनी है जिसपर स्मार्ट सिटी के टीटी नगर में विकसित एबीडी प्रोजेक्ट जैसे छह क्षेत्र विकसित हो सकते हैं। 500 मीटर दूर आबादी प्रमुख कनेक्टिंग रूट्स पर लगभग 3000 हेक्टेयर में मिक्स-यूज लैंड के रूप में इसे विकसित किया जाना प्रस्तावित है।
हाई-डेंसिटी डेवलपमेंट के तहत कॉरिडोर के दोनों तरफ 500 मीटर दायरे में ही सघन असीमित एफएआर के साथ बहुमंजिला निर्माण होंगे। कमर्शियल हब, आइटी पार्क और लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित करने की योजना है।
बीडीए अब तक आपसी करार वाली लैंड पुलिंग पॉलिसी पर मास्टर प्लान रोड व नगर विकास योजना तय करता आया है, लेकिन इस मेगा प्रोजेक्ट में नई पॉलिसी पर काम होगा। आपसी करार वाली स्थिति यहां नहीं बनेगी। निजी निवेशकों को आगे लाकर काम किया जाएगा, ताकि खर्च का बोझ सरकारी जेब पर न आए।
स्ट्रक्चरल इंजीनियर शैलेंद्र बागरे ने योजना को बड़ी चुनौती करार दिया है। उनके अनुसार बिना मजबूत वित्तीय रूपरेखा के 20 हजार करोड़ रुपए की इस योजना को समय पर पूरा करना बेहद कठिन लक्ष्य साबित हो सकता है।
भोपाल विकास योजना (मास्टर प्लान) - 2047 के ड्राफ्ट में 51 किलोमीटर लंबा ग्रोथ कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव है। इसके लिए लगभग 3000 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित है।
यह कॉरिडोर भोपाल एयरपोर्ट, प्रस्तावित एजुकेशन नॉलेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिटी (EKAI City), प्रस्तावित सीएमयू (CMU), लॉजिस्टिक्स और होलसेल (थोक) व्यापार क्षेत्र तथा शहर के विभिन्न उपनगरों को आपस में जोड़ेगा।
यहां आवासीय और शैक्षणिक संस्थान के साथ आईटी (IT) , आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर, डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग हब, होटल, हॉस्पिटैलिटी, मॉल, मल्टीप्लेक्स तथा कॉर्पोरेट ऑफिस बनाए जाएंगे।