भोपाल

विश्वविद्यालयों में कुलपति के चयन में सरकार का होगा दखल

कैबिनेट ने पास किया प्रस्ताव - विश्वविद्यालय के ऐक्ट में संशोधन करने की तैयारी कर रहा है उच्च शिक्षा विभाग
2 min read
• •
Dec 04, 2019
विश्वविद्यालयों में कुलपति के चयन में सरकार का होगा दखल
विश्वविद्यालयों में कुलपति के चयन में सरकार का होगा दखल

भोपाल। राज्य सरकार अब कुलपतियों के चयन में दखल देने की तैयारी कर रही है। इसके लिए विश्वविद्यालय के ऐक्ट में संशोधन करने जा रही है। इस प्रस्ताव को अगली कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा। कैबिनेट पास होने के बाद अब इसे विधानसभा के पटल पर संशोधन प्रस्ताव रखा जाएगा।

प्रस्ताव के अनुसार महाराष्ट्र और राजस्थान की तर्ज पर कुलपति के सर्च कमेटी में एक सदस्य अब राज्य सरकार का होगा। सर्च कमेटी में पारंपरिक विश्वविद्यालयों के जैसे सदस्य रखे जाएंगे, अभी कुछ विश्वविद्यालयों में कार्यपरिषद के एक सदस्य को सर्च कमेटी में रखने का प्रावधान है।

प्रदेश में 21 विश्वविद्यालय हैं। माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय को छोड़कर सभी विश्वविद्यालयों में कुलपति के चयन का अधिकार राज्यपाल के पास होता है। राज्यपाल कुलपति तीन सदस्यीय सर्च कमेटी गठित करता है, जिसमें एक सदस्य यूजीसी का नामित होता है। जबकि दूसरा सदस्य इस कमेटी में राज्य सरकार की तरफ से शामिल नहीं किया जाएगा। इससे चयन प्रक्रिया में सरकर का प्रतिनिधि होने से केन्द्र और राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व बरकरार रहेगा। चयन के दौरान अगर दो सदस्य किसी तरह से सहमत नहीं होते हैं तो दोबारा आवेदन बुलाए जा सकेंगे।

इंदौर, उज्जैन विश्वविद्यालयों में धारा- 52 हटाने की तैयारी

प्रदेश के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर और विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन में धारा 52 हटाने की तैयार की जा रही है। धारा-52 हटाने के बाद सरकार इनमें सरकार कुलपति के चयन की प्रक्रिया शुरू करेगी। इन दोनों विश्वविद्यालयों में कुलपति के नियुक्त करने को लेकर राजभवन और सरकार के बीच जमकर मतभेद उभरकर सामने आया था। चूंकि कुलपति के लिए सरकार की तरफ से जिस प्रोफेसार का नाम भेजा गया था, उस पर राजभवन सहमत नहीं था। मतभेद के चलते काफी समय तक दोनों विश्वविद्यालय बिना कुलपति के ही संचालित हो रहे थे।


चार विश्वविद्यालयों कुलपतियों पर तलवार

प्रदेश के चार विश्वविद्यालयों के कुलपतियों पर तलवार लटकी हुई है। विश्वविद्यालयों में परीक्षा परिणाम लेट होन और इनमें विश्वविद्यालयों में वित्तीय अनियमितताओं की लगातर शिकायतें आना इसकी मुख्य वजह बताई जा रही है। हालांकि इन शिकायतों कि सरकार अपने स्तर पर जांच कर रही है। जिन विश्वविद्यलायों में अनियमितताओं की ज्यादा शिकायतें आई हैं उनमें रानीदुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर, हिन्दी विश्वविद्यालय, भोज विश्वविद्यालय सहित चार विश्वविद्यालय शामिल हैं।

Published on:
04 Dec 2019 07:39 am