
भोपाल. उच्च शिक्षा विभाग ने प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने सहित सत्र 2021-22 अकादमिक कैलेंडर जारी कर दिया है। पांच दिन बाद प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने वाली है। हर साल चार लाख से अधिक विद्यार्थी स्नातक में दाखिला लेते हैं। वहीं 1 सितंबर से शिक्षण कार्य शुरू हो जाएगा, लेकिन नई शिक्षा नीति-2020 लागू करने की बात स्पष्ट नहीं हो सकी है।
उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी प्रदेशभर के सरकारी कॉलेजों के प्रोफेसर्स के साथ मिलकर नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए पिछले महीनों से मशक्कत कर रहे हैं। लेकिन अब जब प्रवेश शुरू होने वाले हैं तो छात्र-छात्राओं के सामने असमंजस है। दरअसल, नए सत्र में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए स्नातक कोर्स की अवधि क्या रहेगी? मल्टीपल एंट्री एग्जिट की सुविधा मिल सकेगी या नहीं, इस संबंध में विभाग की ओर से अब तक कोई सूचना जारी नहीं की जा सकी है। इस मामले में उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार ही विद्यार्थियों को पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा।
अभी सिलेबस को नहीं मिली मंजूरी
उ च्च शिक्षा विभाग द्वारा अभी सत्र 2021-22 के लिए स्नातक पहले वर्ष का सिलेबस भी जारी नहीं किया जा सका है। सिलेबस जारी होने के बाद प्रकाशकों को मार्केट में पाठ्यसामग्री तैयार करने में तीन से चार महीने का समय लग सकेगा। वहीं राज्य सरकार स्कूल में पढऩे वाले आरक्षित वर्ग के छात्र-छात्राओं को हिंदी ग्रंथ अकादमी से प्रकाशित किताबें निशुल्क उपलब्ध कराती है, लेकिन इसके लिए कॉलेजों और अकादमी के बीच लंबी प्रक्रिया चलती है। इसलिए इन विद्यार्थियों को भी कभी भी सत्र शुरू होते ही किताबें नहीं मिल पाती। ऐसे में नए सिलेबस के आधार पर किताबें उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण होगा।
पहले का ट्रेक रिकॉर्ड अच्छा नहीं...
म ध्यप्रदेश उच्च शिक्षा में प्रयोग करने के लिए जाना जाता है। पिछले सालों के ट्रेक रिकॉर्ड को देखें तो किसी भी नीति को लागू करने में उत्साही तो रहता है लेकिन उसका सही ढंग से क्रियान्वयन कराने में भी असफल रहता है। इसमें सबसे बड़ी नाकामी स्नातक स्तर पर सेमेस्टर सिस्टम को लागू करने के मामले में मिल चुकी है। सेमेस्टर सिस्टम 2008 में लागू किया गया। संसाधनों की कमी और छात्र संगठनों के विरोध के चलते स्नातक स्तर पर पाठ्यक्रमों में बार-बार बदलाव कर एकल प्रश्नपत्र प्रणाली पर आधारित पाठ्यक्रम लागू किया गया, लेकिन इस सिस्टम पर रोक लगा दी गई। वहीं वार्षिक पद्धति लागू की गई।
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होगी। मल्टीपल एग्जिट-एंट्री का प्रावधान भी रहेगा। विद्यार्थी इच्छानुसार विषय लेकर पढ़ सकेगा। सभी 79 विषयों का पाठ्यक्रम बन चुका है। राज्यपाल के अनुमोदन के बाद इसे घोषित किया जा सकेगा।
अनुपम राजन, प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा विभाग