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भोपाल में छोटी दुकानों पर कार्रवाई, रसूखदारों पर मेहरबानी ! 106 कमर्शियल इमारतों के स्टे पर आज होगी सुनवाई

Bhopal Master Plan: भोपाल में मास्टर प्लान में देरी और सीलिंग कार्रवाई को लेकर व्यापारी व रहवासी संगठन आक्रोशित हैं। 106 कमर्शियल इमारतों के हाईकोर्ट स्टे खत्म कराने में चूक पर इंजीनियर निलंबित किए गए हैं।
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106 कमर्शियल इमारतों पर आज होगा फैसला, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)

106 कमर्शियल इमारतों पर आज होगा फैसला, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)

Bhopal news:एमपी के भोपाल शहर में कॉलोनी में कारोबार और शहर के मास्टर प्लान में देरी के चलते व्यापारी और रहवासी संगठन लगातार आक्रोशित है। चौथे दिन भी सीलिंग और पंचनामें की कार्रवाई बंद रही। नगर निगम ने पहले त्योहार को देखते हुए इसे रोकने की बात कही थी, लेकिन अब इसके ठंडे पड़ते देख रहवासी संगठनों ने नया मोर्चा खोल दिया है।

उधर 106 कमर्शियल इमारतों को हाईकोर्ट से कार्रवाई से मिली राहत को खत्म कराने के लिए नगर निगम ने आवेदन किया है, जिस पर आज सुनवाई होगी। जिनका कहना है कि नगर निगम कार्रवाई के नाम पर लीपा पोती कर रहा है। छोटे दुकानदारों को परेशान कर रहा है, आलीशान इमारत वाले रसूखदारों पर हाथ नहीं डाल रहा। सरकार की दोहरी नीति के खिलाफ रहवासी संगठनों ने कांग्रेस के साथ सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया।

रहवासियों ने लगाया आरोप

कांग्रेस नेता मोनू सक्सेना, पूर्व विधायक पीसी शर्मा, पार्षद वीनू सक्सेना सहित अनेक लोगों ने कोटरा सुल्तानाबाद में पैदल मार्च निकालकर जल्द मास्टर प्लान लाने की मांग की। संगठनों ने आरोप लगाया है कि नगर निगम के इंजीनियर जानबूझकर दिखावे की कार्रवाई कर रहे है ताकि मामले को ठंडे बस्ते में डाला जा सके। रहवासियों का आरोप है कि घर जाने के लिए घर के बाहर ही जाम से जूझना पड़ता है। शाम के समय यदि टहलने निकले तो वाहनों और बाजार का शोर परेशान कर देता है।

चुपके से लग चुका झटका

सीलिंग और विरोध प्रदर्शन के शोर के बीच नगर निगम की एक चूक दब गई। दरअसल, हाईकोर्ट से जिन 106 कमर्शियल इमारतों को हाईकोर्ट से स्टे मिला था, उनके खिलाफ नगर निगम को 2 सितम्बर को रिकॉर्ड प्रस्तुत करना था लेकिन इंजीनियर हाईकोर्ट पहुंचे नहीं, इससे स्टे खत्म नहीं कराया जा सका। इस पर इंजीनियरों को निलंबित किया गया है।

आज हाई कोर्ट में होगी सुनवाई

शहर की 106 रसूखदार व्यापारियों को मिले स्टे ऑर्डर के खिलाफ हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। निगम की तरफ से बिल्डिंग परमिशन शाखा के इंजीनियर इस सुनवाई में पेश होंगे। इससे पहले दिए गए जवाब से न्यायालय संतुष्ट नहीं हो सका जिसके चलते स्टे ऑर्डर खारिज नहीं हो सके थे। नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने काम में लापरवाही पर लापरवाही पर निगमायुक्त ने दोषी इंजीनियर देवेश गढ़वाल, राकेश लहरिया, कविता सोनी को निलंबित किया है। सिटी प्लानर अनिल कुमार टटवाड़े और सुरेश कुमार राजेश से धीमी कार्रवाई पर जानकारी मांगी गई है।

आवासीय पर 374 वर्गमीटर का कमर्शियल रन

अरेरा कॉलोनी प्लॉट नंबर ई-4/97 पर सीमा यादव के नाम मिली पौने चार सौ वर्गमीटर की आवासीय अनुमति पर व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स तैयार हो गया है। यहां 409 वर्गमीटर प्लॉट एरिया पर 0.75 एफएआर के आधार पर भवन अनुज्ञा 374 वर्गमीटर पर निर्माण की ही मिली, लेकिन व्यावसायिक निर्माण में अनुज्ञा के प्रावधानों को व्यावसायिक निर्माण के अनुसार बदल दिया गया। आवासीय निर्माण की अनुमति में भी बेसमेंट, टेरेस मिलाकर, ग्राउंड फ्लोर के अलावा इसमें दो फ्लोर है। विदेश में रहकर अरेरा में इस आवासीय भूखंड पर व्यावसायिक उपयोग का निर्माण कर लिया गया है। अनुज्ञा में स्पष्ट है कि ये स्वयं के उपयोग के लिए अनुमति है और प्रकोष्ठ विक्रय प्रतिबंधित है।

80 फीसदी भवन चल रहा किराए पर

आवासीय अनुमति से विकसित व्यावसायिक भवनों में से 80 फीसदी, पर खुद भवन स्वामी कारोबार नहीं कर रहे। ये किराए पर दिए हुए हैं। किराया लाखों रुपए बनता है। भवन स्वामी शहर के अन्य शांत क्षेत्रों या विदेशों में रहते हैं। एक ही परिवार के कई भवन है, जिन्हें आवासीय अनुमति पर व्यावसायिक निर्मित कर लिया। अब बड़े शॉपिंग कॉम्प्लेक्स है।