कल शहर में चार हजार से अधिक स्थानों पर होगा होलिका दहन, धुलेंडी पर २ मार्च को शहर में निकलेंगे रंगारंग चल समारोह
भोपाल. शहर में रंगों के पर्व होली का उत्साह नजर आने लगा है। गुरुवार को होलिका दहन के साथ ही पांच दिवसीय रंगोत्सव की शुरुआत हो जाएगी। शहर में तकरीबन चार हजार से अधिक स्थानों पर होलिका दहन किया जाएगा, वहीं २ मार्च को धुलेंडी पर्व होगा। धुलेंडी पर नए और पुराने शहर में रंगारंग चल समारोह निकलेंगे।
शहर के प्रमुख बाजारों में रंग और पिचकारियों की दुकानें सजकर तैयार हैं और खरीदारी का सिलसिला भी शुरू हो गया है। इस बार बाजारों में बच्चों को लुभाने के लिए कई वैरायटियों की पिचकारियां हैं, जिसमें एयर गन, टंकी वाली पिचकारियों को बच्चों अधिक पसंद कर रहे हैं। पिचकारियों की कीमत १० रुपए से लेकर 1500 रुपए तक है। आने वाले एक दो दिनों में बाजारों में और भीड़ बढऩे की संभावना है।
होलिका दहन पर भद्रा का साया नहीं
होलिका दहन गुरुवार को किया जाएगा। आमतौर पर होलिका दहन के दिन भद्रा की स्थिति रहती है, लेकिन इस बार इस पर्व पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। भद्रा सुबह से शाम 6:40 तक रहेगी। शाम 6:40 के बाद रात्रि तक होलिका दहन किया जा सकेगा। शहर में चार हजार से अधिक स्थानों पर होलिका दहन होगा। शहर में आदर्श होलिका दहन के लिए कई संस्थाओं द्वारा जागरुकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। गायत्री शक्तिपीठ की ओर से गुरुवार को शहर में जगह-जगह अश्लील चित्र, साहित्यों का दहन किया जाएगा। यहां गोबर के कंडे भी लोगों को रियायती दरों पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
19 स्थानों पर वन विभाग के स्टॉल
शहर में होलिका दहन के लिए जलाई लकड़ी उपलब्ध कराने के लिए वन विभाग द्वारा शहर में १९ स्थानों पर स्टॉल लगाए जा रहे हैं, यहां लोगों को जलाऊ लकड़ी उपलब्ध कराई जाएगी। यह स्टॉल अहमदपुर डिपो, बिट्टन मार्केट, पत्रकार कॉलोनी, सर्वधर्म कॉलोनी, आनंद नगर, नेहरू नगर, न्यू मार्केट बागसेवनिया, गोविंदपुरा, यूनानी शफाखाना, छोला रोड, जहांगीराबाद, जीआरडी क्रासिंग, शाहजहांनाबाद, बैरागढ़, गांधी नगर, मंगलवारा, मयूर विहार, करोंद चौराहा आदि स्थानों पर लगाए जा रहे हैं।
धुलेंडी पर निकलेंगे रंगारंग चल समारोह
धुलेंडी के मौके पर शुक्रवार को नए और पुराने शहर में रंगारंग चल समारोह निकाले जाएंगे। पुराने शहर में हिन्दू उत्सव समिति की ओर से दयानंद चौक से आकर्षक चल समारोह निकाला जाएगा। इसमें बैंड, तासे, राधा कृष्ण की झांकियां, रंगों और पानी के टैंकर, गुलाल उड़ाती गाडि़यां, हुरियारे शामिल होंगे। इसी प्रकार नवयुवक हिन्दू उत्सव समिति की ओर से शबरी नगरी नेहरू नगर से जवाहर चौक तक रंगारंग चल समारोह निकाला जाएगा। इसमें स्वांगधारी, पानी और रंग का टैंकर, झांकियां, विभिन्न मंडलिया और हुरियारे शामिल होंगे।
होली पर डूंड उत्सव के साथ होता है नन्हे मेहमान का स्वागत
भोपाल. खुशियों और रंगों के पर्व होली को मनाने के अंदाज भी अलग-अलग हैं। कहीं लट्ठमार होली, तो कहीं फूलों की होली, तो कहीं कीचड़ की होली होती है। शहर में निवासरत पालीवाल समाज के लोग भी होली को अलग अंदाज में मनाते हैं। धुलेंडी अथवा अगले दिन समाज के लोग सामूहिक रूप से डूंड उत्सव का आयोजन करते हैं। इसमें उन बच्चों का डूंड होता है, जिनकी पहली होली होती है। इस दौरान बच्चे को बीच में बिठाकर उसके सिर से थोड़ी दूरी पर एक डंडा रखा जाता है, उस डंडे को पांच लोग डंडे से मारते हैं, और नन्हे मेहमान का स्वागत किया जाता है। हरिया, हरिया, हरिया देवी, हरिया बच्चे तोर तुरंगी के जयकारों के साथ समाज के बड़े बुजुर्ग बच्चे की सिर से थोड़ी दूर रखे डंडे पर डंडा रखते हैं और बच्चे की यश, कीर्ति, सुख समृद्धि और आरोग्य की कामना करते हैं। होली पर हर साल यह आयोजन किया जाता है। यह परम्परा कई सालों से चली आ रही है। इसके तहत पालीवाल परिवार में बच्चे के जन्म के बाद पहली होली पर बच्चों को बड़े बुजुर्ग का आशीर्वाद देने के लिए यह आयोजन किया जाता है। पालीवाल समाज के गणेश पालीवाल बताते हैं कि जिस भी बच्चे की पहली होली होती है, उसका डूंडोत्सव मनाया जाता है, समाज के सभी लोग एकत्रित होकर उस बच्चे को आशीर्वाद देते हैं। बच्चा निरोगी रहे, और उसके आयु में वृद्धि हो, इसके लिए यह किया जाता है। कई सालों से यह परम्परा समाज में चली आ रही है।