
भोपाल. अगर आप भी घर बनाने का सपना संजोए बैठे हैं तो अब आपकी मुश्किलें बढ़ती जा रही है। पहले सरकार ने होम लोन पर मिलने वाली सब्सिडी खत्म की अब मकान बनाने में लगने वाली ईट, सरिया, सीमेंट और रेत भी मंहगी हो गई है। बढ़ती महंगाई से जहां आम आदमी परेशान है वही रीयल स्टेट कारोबारी भी सरकार के कदम से मुश्किल में दिखाई दे रहे हैं।
दरअसल भवन निर्माण में उपयोग होने वाली फ्लाई-ऐश ईटें भी अब महंगी हो गई है। 1 अप्रेल के पहले इन ईंटों पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगता था, उसे बढ़ाकर अब 12 प्रतिशत की श्रेणी में कर दिया है। फ्लाई-ऐश ईंटें कोयले की राख, महीन बालू रेत और सीमेंट-पानी को मिलाकर बनाई जाती है। इन्हें सीमेंट-ईंट भी कहा जाता है।
केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर बोर्ड ने 31 मार्च को अधिसूचना जारी कर फ्लाई-ऐश ईंट के जीएसटी स्लैब में बदलाव कर इन्हें 12% की श्रेणी में ला दिया है। यह बदली हुई दरें 1 अप्रेल 2022 से लागू हो गई है। हालांकि इन आयटमों में यह विकल्प भी दिया है कि अगर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की छूट नहीं ली जाती तो 6 प्रतिशत की दर से भी कर का भुगतान किया जा सकता है। जैसा कि जीएसटी कानून के अंतर्गत कर का भार अंततः सामान का उपयोग करने वाले पर आता है। इस वृद्धि से भवन निर्माण की कीमतों में वृद्धि होगी।
केन्द्रीय माल एवं सेवा कर की अनुसूची 1 में उल्लेखित सामानों पर 5 प्रतिशत की दर से टैक्स लगता है एवं अनुसूची 2 में उल्लेखित सामानों में 12 प्रतिशत की दर से टैक्स लगता है। सीबीआईसी द्वारा जारी की गई अधिसूचना में फ्लाई-ऐश ब्रिक्स इत्यादि को भी अनुसूची 1 से निकालकर अनुसूची 2 में डाल दिया गया है। सीए नवनीत गर्ग ने इस बदलाव को लेकर बताया कि निश्चित रूप से फ्लाई-ऐश ईंटों की कीमतें बढ़ेगी। इसका असर ग्राहकों पर ही आएगा।
इधर बिल्डरों की संस्था क्रेडाई ने फ्लाई-ऐश ईटों पर टैक्स श्रेणी में बदलाव को लेकर कहा है कि इस निर्णय से तैयार मकानों की कीमतों में अंतर आ जाएगा। क्रेडाई यूथ विंग की ओर से अध्यक्ष नमन अग्रवाल ने बताया कि सरकार को इस पर सब्सिडी देना चाहिए। एक अन्य बिल्डर ने कहा कि पर्यावरण को देखते हुए लाल ईटें पहले ही प्रतिबंधित कर दी गई है। अब कोयले की राख से बनी ईंटों की दरों में भी बदलाव किया है।