भोपाल

एमपी के सैकड़ों अतिथि शिक्षकों की नौकरी पर खतरा, आदेश जारी

MP news: दिव्यांग बच्चों का नया सत्र खटाई में, इन्हें पढ़ाने वाले अतिथि शिक्षकों की नौकरी खत्म हो रही है, आदेश में हवाला नीहं मिली अनुमति....

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Mar 27, 2026
MP News Atithi Shikshak big News(photo:freepik)

MP News Atithi Shikshak Relieved: स्कूल शिक्षा विभाग के एक आदेश से प्रदेश के एक लाख दिव्यांग बच्चों का नया शिक्षा सत्र खटाई में पड़ गया है। इन्हें पढ़ाने वाले 500 दिव्यांग अतिथि शिक्षकों की नौकरी एक माह पहले ही खत्म हो रही है। ये शिक्षक कक्षा नौंवी से बारहवीं तक के लिए अस्थाई तौर पर रखे गए हैं। एक अप्रेल से सत्र शुरू होने के दौरान बड़ी मुसीबत हो सकती है।

एमपी स्कूल शिक्षा विभाग (School Education Department) की ओर से राजधानी के आठ स्कूलों में अतिथि शिक्षक रखे गए थे, जो तीन हजार बच्चों को सिखाने की जिम्मेदारी इन्हें दी है। वहीं प्रदेश के पांच सौ स्कूलों में इनकी तैनाती है।

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सरकार से मंजूरी में देरी का असर, जानें क्या है नियम

नियमानुसार हर नये सत्र में दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने अतिथि शिक्षकों (Atithi Shikshak Relieved) की नियुक्ति के लिए केंद्र सरकार से अनुमति लेनी होती है। इसका कारण होता है कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत अतिथि शिक्षकों के लिए भी बजट दिया जाता है। लेकिन इस बार केंद्र सरकार से अनुमति नहीं मिली। आदेश में इसका हवाला दिया गया है। राजधानी में दिव्यांग शिक्षक सुनील सालगवकर ने बताया, इस आदेश से कई शिक्षकों के सामने परेशानी खड़ी हो जाएगी।

01 अप्रैल से स्कूल, विभाग के पास विकल्प नहीं

बता दें कि नया शिक्षण सत्र 2026-27, 1 अप्रैल 2026 से शुरू होना है। ऐसे में बच्चों के एडमिशन की प्रक्रिया भी शुरू होने जा रही है। एडमिशन से लेकर नए सत्र की कक्षाओं तक दिव्यांग बच्चों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। यानी सत्र की शुरुआत में ही बच्चों को एक महीने तक शिक्षक नहीं मिल पाएंगे।

समग्र शिक्षा के तहत गुरुवार को जारी हुआ आदेश

यह आदेश समग्र शिक्षा अभियान के तहत गुरुवार को जारी किया गया है। अपर परियोजना समन्वयक नंदा भलावे कुशरे के इस आदेश के मुताबिक भारत सरकार से निर्देश न मिलने के कारण इन सभी अतिथि शिक्षकों की नौकरी एक महीने पहले ही खत्म की जा रही है। जबकि इन्हें 30 अप्रैल तक की नौकरी के लिए नियुक्ति पत्र मिला था।

अब समस्या कहां?

दरअसल बड़ी समस्या को लेकर केंद्र से अनुमति में देरी की बात कही गई है। वहीं राज्य सरकार के पास इस व्यवस्था के लिए कोई दूसरा विकल्प नहीं है। इसके कारण सत्र 2026-27 शुरू होने से पहले योजना का क्रियान्वयन नहीं किया जा सकेगा। अस्थायी व्यवस्था पर ज्यादा निर्भरता भी परेशानी की बड़ी वजह बन गई है।

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Updated on:
27 Mar 2026 12:33 pm
Published on:
27 Mar 2026 10:38 am
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