
IAS Misha Singh: भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की अधिकारी मिशा सिंह एक बार पुन: चर्चा में हैं। उन्होंने कलेक्टर बनने से इंकार कर दिया है। प्रदेश में 24 जुलाई 2026 को देर रात जिन 20 आईएएस अफसरों को इधर से उधर किया गया था उनमें आईएएस मिशा सिंह भी शामिल थीं। वे रतलाम की जिला कलेक्टर थीं। आईएएस मिशा सिंह का तबादला करते हुए उन्हें शहडोल जिले की कमान सौंपी गई थी। व्यक्तिगत कारणों से उन्होंने शहडोल का कलेक्टर बनने से इंकार कर दिया। अब उन्हें नगरीय प्रशासन अपर आयुक्त बना दिया गया है।
एमपी कैडर की 2016 बैच की आईएएस मिशा सिंह को वरिष्ठ अधिकारी के रूप में प्रशासनिक कामकाज का करीब 10 वर्षों का अनुभव है। वे सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर बेहतरीन ढंग से लागू करने के लिए पहचानी जाती हैं। आईएएस मिशा सिंह जबलपुर में एडीएम (ADM) भी रहीं।
3 अगस्त 1988 को जन्मीं मिशा सिंह ने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा-में ऑल इंडिया 64वीं रैंक हासिल की थी। उन्होंने बीए के बाद एलएलबी किया। मिशा सिंह ने एडीआर में पीजी डिप्लोमा भी किया। वे ग्रामीण अंचल के साधारण किसान परिवार में जन्मी थीं।
आईएएस मिशा सिंह की कामयाबी की कहानी में न केवल बेहद संघर्ष छिपा है बल्कि युवाओं के लिए यह बहुत प्रेरणादायक भी है। उन्होंने एलएलबी करने के बाद यूपीएससी की तैयारी शुरू की पर शुरुआती दो कोशिश नाकामयाब रही। मिशा सिंह को सिविल सेवा के लिए यूपीएससी में तीसरे प्रयास में सफलता मिल सकी थी।
रतलाम में जिला कलेक्टर के कार्यकाल के दौरान आईएएस मिशा सिंह बेहद सुर्खियों में रहीं। 'पॉलिटिकल प्रेशर' संबंधी एक सवाल पर उन्होंने बेहद संतुलित जवाब दिया था। उनका कहना था कि सांसद और विधायक जनता द्वारा चुने जनप्रतिनिधि होते हैं। उन्हें जनता को जवाब भी देना होता है। यही कारण है कि वे प्रशासनिक अधिकारियों से समस्याओं के निराकरण और विकास की अपेक्षा करते हैं।
आइएएस मिशा सिंह को शनिवार को शहडोल कलेक्टर बनाया था। उन्होंने कलेक्टरी लेने से मना किया तो आदेश में बदलाव कर नगरीय प्रशासन अपर आयुक्त बना दिया है। बताया जा रहा है कि आइएएस मिशा सिंह प्रेग्नेंट हैं। इसी वजह से उन्होंने शहडोल जाने में असमर्थता दिखाई। मिशा सिंह ने भोपाल या इंदौर में पदस्थ करने का सरकार से अनुरोध किया था। इसे स्वीकार करते हुए नगरीय विकास एवं आवास विभाग में अपर आयुक्त बनाकर उन्हें भोपाल में पदस्थ कर दिया गया है।