लोकसभा चुनाव में भाजपा के बैनर-पोस्टर से गायब हुए भारत के दसवें प्रधानमंत्री, विधानसभा चुनाव में भाजपा के सबसे बड़े नेता पर केंद्रित थे कई कार्यक्रम, सात माह में भुला दिए गए अटल
भोपाल. भाजपा ने इस लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी के सबसे बड़े नेता अटल बिहारी वाजपेयी को उनके निधन के सिर्फ सात माह बाद ही भुला दिया है। पूर्व प्रधानमंत्री का निधन 16 अगस्त 2018 को हुआ, और उस समय प्रदेश के विधानसभा चुनाव सामने थे। भाजपा ने तकरीबन दो माह तक अटलजी की याद में गांव-गांव तक कार्यक्रम किए।
चुनाव में भी अटलजी की यादे छाई रही, लेकिन लोकसभा चुनाव में इसके उलट नजारा है। भाजपा के चुनाव कैंपेन में अटल बिहारी वाजपेयी नदारद है। न तो केंद्रीय संगठन ने अटल केंद्रित कोई कार्यक्रम बनाया है और ना ही उनके गृह प्रदेश में उन्हें याद किया जा रहा है। अब तक के चुनाव प्रचार में अटल बिहारी वाजपेयी न तो भाषणों में है और ना ही पोस्टर बैनर में।
विधानसभा चुनाव से पहले यह हुए कार्यक्रम
अटल अस्थि कलश यात्रा: भाजपा ने प्रदेश में 11 अस्थि कलशों की श्रद्धांजलि यात्रा निकाली। इन्हें प्रदेश की अलग-अलग नदियों में प्रवाहित करने प्रदेश कार्यालय में एक कार्यक्रम करके वहां से रवाना किया गया। कार्यक्रम एक माह चला।
श्रद्धांजलि सभाएं: अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद भाजपा ने प्रत्येक मंडल स्तर पर श्रद्धांजलि सभाओं का सिलसिला शुरू किया।
कवि सम्मेलन: 16 सितंबर को अटलजी के निधन का पहला मासिक श्राद्ध था। इस मौके पर हर जिला मुख्यालय पर अटलजी की कविताओं का पाठ करवाया।
चुनाव प्रचार में अटल: विधानसभा चुनाव के प्रचार में अटल बिहारी वाजपेयी का नेताओं ने भाषणों में खूब स्मरण किया। अटलजी के प्रदेश से जुड़ाव भुनाने की कोशिश भी भाषणों में दिखी।
अटल जी सारे देश के प्रेरणा पुरुष हैं। लिहाजा उन्हें चुनाव की दृष्टि से देखना ठीक नहीं होगा। सारा देश सदियों तक उनसे प्रेरणा पाता रहेगा। जहां तक लोकसभा चुनाव की बात है तो हम यह चुनाव पिछले पांच वर्ष में राजग सरकार के कामकाज और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर लड़ रहे हैं। हम अपनी सरकार की उपलब्धियां घर-घर ले जा रहे हैं।
डॉ. दीपक विजयवर्गीय, मुख्य प्रवक्ता भाजपा मप्र