
भोपाल. लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आती जा रही वैसे-वैसे राजनीतिक सियासत में बयानबाजी में तेज होती जा रही। रविवार को कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि भोपाल लोकसभा सीट पर कांग्रेस के पक्ष में माहौल है। उन्होंने कहा कि चुनाव में 28 दिन बाकी हैं लेकिन बीजेपी अभी तक अपना प्रत्यशी घोषित नहीं कर पा रही है।
30 साल बाद होगी कांग्रेस की ऐतिहासिक जीत - जयवर्धन सिंह
भोपाल लोकसभा सीट से कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह सहित कांग्रेस कार्यकर्ता घर-घर प्रचार कर रहे हैं। जयवर्धन सिंह ने कहा 23 तारीख को जब नतीजे आएंगे तब 30 साल बाद कांग्रेस की ऐतिहासिक जीत होगी। इस दौरान उन्होंने खजूरी सड़क पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं से चुनावी तैयारी को लेकर भी चर्चा की।
कांग्रेस इन हारे हुए नेताओं के सहारे
ग्वालियर: अशोक सिंह, लगातार तीन बार ग्वालियर से लोकसभा चुनाव हारे हैं (2007, 2009 एवं 2014)।
मुरैना: रामनिवास रावत को विस चुनाव में हार मिली।
जबलपुर: विवेक तन्खा, 2014 में जबलपुर से लोकसभा चुनाव हारे।
सीधी: अजय ङ्क्षसह, 2014 में सतना लोकसभा सीट पर हारे, 2018 में चुरहट विधानसभा सीट पर हार मिली।
बालाघाट: मधु भगत, 2018 में विधानसभा चुनाव हारे, तीसरे नंबर पर रहे लेकिन अब लोकसभा का टिकट।
सतना : राजाराम त्रिपाठी, 2009 में सपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव हारे।
मंदसौर: मीनाक्षी नटराजन, 2014 में मंदसौर से लोकसभा चुनाव हारीं।
खंडवा: अरूण यादव, 2014 में खंडवाल सीट से लोकसभा और 2018 में बुदनी सीट से विधानसभा चुनाव हारे
विदिशा: शैलेंद्र पटेल, 2018 में इछावर विधानसभा सीट से चुनाव हारे।
भाजपा इनके दम पर लड़ रही है चुनाव
ग्वालियर: विवेक शेजवलकर, 1998 में विधानसभा चुनाव हारे। हालांकि दो बार महापौर बने।
उज्जैन: अनिल फिरोजिया, 2018 में तराना से विधानसभा चुनाव हारे।
शहडोल: हिमाद्री सिंह, शहडोल लोस उपचुनाव में कांग्रेस के टिकट पर हारीं, अब भाजपा ने बनाया उम्मीदवार।
बालाघाट: ढाल सिंह बिसेन, 2008 व 2013 में विस चुनाव में हारे। 2018 में विधायक का ही टिकट नहीं मिला।
खरगोन : गजेंद्र पटेल, 2013 में विस चुनाव एवं एक बार बड़वानी नगर पालिका अध्यक्ष का चुना हारे।
भिंड: संध्या राय, पिछली बार विधायक का टिकट नहीं दिया अब लोकसभा में उतारा।