Janmashtami 2024: हर साल जन्माष्टमी पर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल आते हैं अनोखे लड्डू गोपाल, साल भर भक्तों के घर जाकर देते हैं सेवा का मौका, 2-2 साल तक रहती है बुकिंग फुल..भक्त बच्चों की तरह करते हैं पालन-पोषण, झुलाते हैं झूला। patrika.com पर आप भी देखें नटखट कन्हैया की मजेदार और रोचक हैरान कर देने वाली बातें
Janmashtami 2024: कई बार आपने सुना होगा कि आज भगवान गणेश दूध पी रहे हैं…हनुमान जी नारियल का प्रसाद खा रहे हैं… या फिर मूर्तियां दूध पी रही हैं। लेकिन आज जन्माष्टमी के अवसर पर हम आपको बता रहे हैं ऐसे अनोखे लड्डू गोपाल (श्रीकृष्ण) के बारे में जिन्हें अगर दूध पिलाया जाए तो वे उसे बच्चों की तरह उगल देते हैं।
वहीं दूध के साथ चाय और पेप्सी झट से पी जाते हैं। यही नहीं भक्त तो ये भी कहते हैं कि छोटे से ये लड्डू गोपाल की ये मूरत धीरे-धीरे बढ़ भी रही है। इस धातु की मूर्ति के मुंह पर यदि चाय, दूध या पेप्सी से भरा चम्मच लगाएंगे तो वो देखते ही देखते गायब हो जाता है। कुछ लोग इसे अंधविश्वास कहते हैं तो कुछ चमत्कार।
मध्य प्रदेश के धातु के लड्डू गोपाल की एक मूर्ति हमेशा से ही चर्चा में रहती है। लोगों का मानना है कि उन्होंने इस मूर्ति का आकार बढ़ते हुए देखा है। वजन भी धीरे-धीरे बढ़ रहा है। इतना ही नहीं इस मूर्ति को बच्चे की तरह दुलार दे रहे लोगों ने बताया कि यह लड्डू गोपाल अनोखे हैं। बच्चे की तरह सुबह-सुबह दूध उगल देते हैं और बड़ों की तरह चाय पी जाते हैं।
भोपाल के ईश्वर नगर में लड्डू गोपाल की यह मूर्ति मेहमान बनकर आती है। लोगों के अनुसार यह चमत्कारिक प्रतिमा है। लड्डू गोपाल का आकर्षण इतना है कि इन्हें घर ले जाने वालों का तांता लगा रहता है। लड्डू गोपाल को पालने में झुलाने के लिए भी लोगों की भीड़ लग जाती है। यह मूर्ति भोपाल के ईश्वर नगर में हर साल लाई जाती है, जो इनके घर मेहमान बनकर रहते हैं और बड़ी संख्या में भक्त उनकी सेवा करते हैं और भजन कीर्तन करते हैं।
भक्त बताते हैं लड्डू गोपाल दही, दूध मक्खन, मिश्री और लड्डू भी खिलाया जाता है। यह प्रतिमा एक के बाद एक भक्तों के निवास पर मेहमान बनकर पहुंचती है। कई भक्तों का नंबर दो-तीन सालों में लगता है।
भोपाल के पंडित जगदीश शर्मा के अनुसार हमें इस मूर्ति का हर साल पूजन करने का अवसर मिलता है। लड़्डू गोपाल की यह मूर्ति उत्तरप्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के कई जिलों में भक्तों के निवास पर जा चुकी है। वहां तीन दिनों तक लाड़-प्यार से रखा जाता है उसके बाद दूसरे भक्त के पास चले जाते हैं।
अन्य भक्तों का कहना है कि कई धातुओं से मिलकर यह मूर्ति बनी है। इसका आकार भी लगातार बढ़ रहा है। भक्तों का भी मानना है कि हर साल इनका वजन बढ़ते हुए उन्होंने महसूस किया है।
लड्डू गोपाल के साथ उनके भक्त एक बच्चे के समान ही व्यवहार करते हैं। लड्डू गोपाल को गर्मी हवा में घुमाना और गाय दिखाने भी ले जाया जाता है। बच्चे की तरह उन्हें खिलाया और पिलाया जाता है। लोरी सुनाकर उन्हें सुलाया जाता है।
लड्डू गोपाल के भक्त इस मूर्ति को चमत्कारिक मानते हैं। उनका कहना है कि जब सुबह-सुबह लड्डू गोपाल को उठाया जाता है और उन्हें बच्चों की तरह दूध पिलाया जाता है तो वह दूध उगल देते हैं। इसके बाद जब चाय पिलाई जाती है, वो भी पीने लगते हैं। इसके बाद इन्हें दिन में नहलाया जाता है।
मुकुट, मोरपंख, बांसुरी लगाकर उनका श्रृंगार किया जाता है। शाम के बाद भजन गाकर बच्चे की तरह दिल बहलाया जाता है और रात को लोरिया गाकर बच्चे की तरह ही उन्हें सुलाया जाता है। इस प्रकार लोग एक बच्चे की तरह ही लड्डू गोपाल को अपने करीब होने का अहसास करते हैं।
Watch Video
लड्डू गोपाल के कानों में भक्त अपनी मुराद कहते हैं। लोगों का मानना है कि यह मुराद कुछ ही दिनों में पूरी हो जाती है। जो भी इच्छाएं उनके कानों में बोली जाती है, वह पूरी हो जाती है।
माना जाता है कि जो निःसंतान दंपती पर भगवान ज्यादा कृपा करते हैं। बाल गोपाल के बारे में कहा जाता है कि सभी निःसंतानों की मुराद वह सबसे पहले सुनते हैं। उन्होंने कई लोगों को संतान का आशीर्वाद दिया है।