
Jitu Patwari- मध्यप्रदेश में आदिवासियों की आबादी सबसे ज्यादा है। यहां डेढ़ करोड़ से अधिक आदिवासी रहते हैं। राज्य सरकार ने इन्हें अनेक विशेषाधिकार दे रखे हैं। इनमें सबसे प्रमुख है- आदिवासियों की जमीन बेची नहीं जा सकती, इसे कोई अन्य खरीद नहीं सकता। हालांकि इस नियम का धड़ल्ले से उल्लंघन किया जाता रहा है। यहां तक कि प्रदेश के अनेक कलेक्टर भी आदिवासियों की जमीन बेचने की अनुमति देने पर आरोपों के घेरे में हैं। अब प्रदेश कांग्रेस ने यह मुद्दा उठाया है। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने बीजेपी नेताओं और उनके समर्थक उद्योगपतियों पर आदिवासियों की कई लाख एकड़ जमीन खरीदने का आरोप लगाया। उन्होंने पूरे मामले की राष्ट्रपति से जांच की मांग भी की है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भोपाल में आयोजित प्रेस वार्ता में आदिवासियों के शोषण के कई गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि नियमानुसार मध्यप्रदेश में आदिवासी भूमि का गैर- आदिवासियों को हस्तांतरण सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना नहीं हो सकता। इसके बावजूद बड़ी संख्या में जमीनों के सौदे हुए हैं।
जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि पिछले करीब आठ वर्षों में मध्यप्रदेश में आदिवासियों की लगभग तीन लाख एकड़ (करीब 1.26 लाख हेक्टेयर) भूमि बेची गई। इसे भाजपा नेताओं, उनसे जुड़े उद्योगपतियों और प्रभावशाली लोगों ने सरकारी संरक्षण में खरीदा। उन्होंने राष्ट्रपति से आदिवासी भूमि हस्तांतरण और इसकी अनुमति से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच कराने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने यह आरोप भी लगाया कि खनन परियोजनाओं और बड़ी कंपनियों को भूमि आवंटन के कारण आदिवासियों को उनकी पुश्तैनी जमीनों से बेदखल किया गया। उन्होंने कहा कि इससे आदिवासी पलायन के लिए मजबूर हुए।
पटवारी ने कहा, कांग्रेस की सरकार बनने पर सभी भूमि सौदों की निष्पक्ष जांच कराएंगे। जहां भी अनियमितता या अवैध भूमि हस्तांतरण सामने आएगा, वहां दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कर आदिवासियों की जमीन उन्हें वापस दिलाई जाएगी।
प्रेस वार्ता में जीतू पटवारी ने भाजपा पर 500 करोड़ रुपए के तबादला उद्योग चलाने का भी आरोप लगाया। साथ ही, दिग्विजय सिंह से जुड़े वायरल वीडियो को भाजपा की साजिश और छेड़छाड़ किया गया वीडियो बताया।
बता दें कि पूर्व सीएम कमलनाथ भी आदिवासी बाहुल्य छिंदवाड़ा जिले में आदिवासियों की जमीन की बड़े पैमाने पर खरीद फरोख्त के आरोप लगाते रहे हैं। इस मुद्दे पर जिले में अनेक विवाद भी हो रहे हैं।